Nai Gulistan : Vols. 1-2

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Nai Gulistan : Vols. 1-2

Nai Gulistan : Vols. 1-2

By Kaifi Azmi • Publisher Rajkamal Prakashan
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ग़ालिब का एक शेर ज़़रा सी हेर-फेर के साथ पेश है—

होगा कोई ऐसा भी जो कैफ़ी को न जाने

शायर तो वो अच्छा है पे... ... ...

और इस ‘पे’ (लेकिन) के बाद बहुत कुछ आ सकता है, वह भी जो ‘ग़ालिब’ ने कहा और उसके अलावा बहुत कुछ और भी। कैफ़ी आज़मी के मुआमले में इस ‘पे’ के बाद उनके एक और व्यक्तित्व का तज़्करा भी आ सकता है जिसके दर्शन आपको इस संकलन के पृष्ठों में होंगे।

इसमें कोई शक नहीं कि कालमनिगार एक वाहियाततरीन काम है। वक़्ती घटनाओं पर वक़्ती तब्सरा करना कालमनिगार का काम होता है। और यही कारण है कि कालमनिगार का क़लम जब ठहरता है तो बहुत जल्द उसका पाठक उसे भुला भी देता है।

लेकिन इसी के बीच इक्का-दुक्का मिसालें ऐसी मिलती हैं जिनमें एक कालमनिगार का जौहर वक़्त की सरहदों को पार करता नज़र आता है। ‘नई गुलिस्ताँ’ में कैफ़ी की रचनाएँ भी इसी श्रेणी में रखी जाने की चीज़ें हैं।

कॉलम के रूप में कभी छपी इन रचनाओं में कैफ़ी की अपनी एक अलग ही शैली अपने पूरे तबो-ताब के साथ दिखाई देती है। कैफ़ी का हमज़ाद एक हिकायतनवीस इनमें से अधिकांश रचनाओं का ‘सूत्रधार’ है और किसी नीति-कथा, किसी ऐतिहासिक घटना या किसी लतीफ़े के माध्यम से अपने समय की राजनीति पर एक चुभता हुआ तब्सरा करता है। फिर जिस तरह जातक कथाओं में बुद्ध अन्त में एक नीति-वाक्य बोलते दिखाई देते हैं, उसी तरह इन रचनाओं में कैफ़ी अन्त में एक ‘राजनीतिक-वाक्य’ बोलते नज़र आते हैं। अधिकांश रचनाओं का अन्त कुछ अशआर पर या कुछ सुप्रचलित अशआर की पैरोडी पर होता है जो अपना ख़ुद का एक लुत्फ़ पैदा करते हैं। इसके अलावा इस पूरे संकलन को नज़्म (पद्य) में लिखी नस्र (गद्य) का नाम दें, जो तथाकथित नस्री नज़्म (गद्य-काव्य) से कहीं बहुत ऊँचे दर्जे की चीज़ है, तो कुछ ग़लत नहीं होगा। इस पूरे संकलन में शायद ही कोई ऐसा वाक्य आपको मिले जिसमें कैफ़ी ने अपनी शे’री फ़ितरत छोड़ी हो और क़ाफ़ियापैमाई न की हो। दूसरे अलफ़ाज़ में, कैफ़ी की नस्र भी बड़े ठस्से के साथ यह कहती हुई नज़र आती है कि मैं किसी नस्रनिगार की नहीं, शायर की रचना हूँ। नतीजा यह कि पाठक के लिए इस अच्छे-ख़ासे भारी संकलन में बोर होने का कहीं कोई मुक़ाम नहीं है।

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Book Details

Publisher
Rajkamal Prakashan
Edition
1st
ISBN
NG-1-2
Year
1998
Format
Hardcover
Language
Hindi
100% Original Books Every title is sourced from trusted publishers.
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