Nadiyaan Nahi Rukti + Chuppi Is Daur Ka Ek Kamra Hai + Amavas Mein Jugnoo + Ghar Ke Vaaste – Combo Book Set of 4
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Nadiyaan Nahi Rukti - आदित्य रहबर का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी प्रखंड के पानापुर हवेली गांव में हुआ। इन्होंने लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर से स्नातक किया और वर्तमान में हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर के साथ ही, सिविल सेवा परीक्षा की भी तैयारी कर रहे हैं। आदित्य लेखन के क्षेत्र में सक्रिय है इनकी कविताएँ सत्ता एवं समाज से सवाल उठाते हुए अप्रिय सत्य को उजागर करती हैं। हजारीबाग प्रशासन ने इनकी कविता को होर्डिंग पर प्रदर्शित किया, और बहराइच के एक स्कूल की दीवार पर भी कविता लिखी गई। आदित्य शॉर्ट फ़िल्में भी लिखते हैं, जिनमें 'ईदी' को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चुना गया है। उनकी फिल्म 'विराम' को भी सराहा गया है। 2024 में इन्हें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा महाकवि आरसी प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान से नवाज़ा गया है।
Chuppi Is Daur Ka Ek Kamra Hai - "चुप्पी इस दौर का एक कमरा है" समकालीन हिंदी कविताओं का एक संवेदनशील संग्रह है। अंबुज आनंद अपनी दूसरी पुस्तक में प्रेम, चुप्पी, रिश्तों, अकेलेपन और आज के युवा मन की भावनाओं को सरल लेकिन गहरी भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। युवा पाठकों के बीच बेहद पसंद की जाने वाली यह पुस्तक पंक्ति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है। यदि आपको आधुनिक हिंदी कविता पसंद है, तो यह संग्रह आपके लिए है।
Amavas Mein Jugnoo - गणित के प्रोफ़ेसर रहे कुमार विनोद की यह पृष्ठभूमि उनकी ग़ज़लों में भी झलकती है। एक गणितज्ञ जब शायरी करेगा तो यक़ीनन सब कुछ नपा-तुला होगा। कुमार विनोद की इन ग़ज़लों में शब्दों का चुनाव, क़ाफ़िये और रदीफ़ एकदम सधे और नपे-तुले हुए हैं। इस संग्रह की ग़ज़लों में इस्तेमाल हुए क़ाफ़िये अगर लाजवाब करते हैं, तो तनिक हटकर के लिए गये रदीफ़ अचंभित । मौलिक बिंबों वाली इन ग़ज़लों का टटकापन हैरत में डाल देता है । कुमार विनोद सिर्फ़ मिज़ाज ही नहीं, ग़ज़लों का शऊर भी बख़ूबी पहचानते हैं। एक निहायत नये मुहावरे और अंदाज़ के साथ वे इस संग्रह की ग़ज़लों में जहाँ एक ओर जीवन के विराट फ़लक की पृष्ठभूमि में उत्सवधर्मिता के विविध रंगों को रूपायित करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर इन ग़ज़लों में सामाजिक सरोकार भी बड़े सलीक़े के साथ अभिव्यक्त हुए हैं । इन ग़ज़लों में अनेक अश' आर ऐसे हैं जो हमारे मेमरी कार्ड पर दर्ज हो जाते हैं। कई बार अंदाज़ सवाल-जवाब का होता है। कुमार विनोद अपने पाठकों को किसी ऊँचे डायस पर चढ़कर संबोधित नहीं करते बल्कि अगल-बगल बैठकर कुछ कहते और कुछ सुनते-से लगते हैं।
Ghar Ke Vaaste - यह लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का पहला काव्य संग्रह है। इसके हर गीत और नज़्में पहले ही लोगों की ज़ुबान पर हैं। स्वयं श्रीवास्तव अपने समय की असल समस्याओं को उठाते हैं। उनकी कविताओं में युवा मन की बेकरारी, बेकारी, प्रेम, असफलताबोध और सौन्दर्याकांक्षा मिलेगी। जब उनकी हिन्दुस्तानी जुबान में आप इन्हीं चीज़ों को सुनते हैं तो एक ही बात जेहन में कौंधती है- “देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा मैं ने ये जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है”।
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Book Details
- Publisher
- Combo
- ISBN
- Diwali_Combo_15
- Year
- 2026
- Format
- Paperback
- Pages
- 511
- Language
- Hindi
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