Mohabbat Ki Dukaan | मोहब्बत की दुकान By Yashwant Vyas
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मोहब्बत की दुकान दुकान अगर हुई तो सौदे की रेट लिस्ट भी होगी। रेट लिस्ट है तो प्रॉफिट का हिसाब भी होगा। जो मोहब्बत में भी प्रॉफिट निकाल ले उसे इश्क़ की इल्लत पालने की बजाय परचून का धंधा खोल लेना चाहिए। एक सांस में पढ़ जाने लायक बतकहियों का खाता खोलती जुमलों के दौर की जानलेवा कहानियां यशवंत व्यास नए प्रयोगों के लिए चर्चित व्यंग्यकार पत्रकार. बोसकीयाना, कवि की मनोहर कहानियां, चिंताघर, कामरेड गोडसे, ख्वाब के दो दिन, अपने गिरेबान में, कल की ताज़ा ख़बर, अमिताभ का अ, अब तक छप्पन, इन दिनों प्रेम उर्फ लौट आओ नीलकमल, यारी दुश्मनी, जो सहमत हैं सुनें आदि किताबें. कई मीडिया उपक्रमों में प्रमुख रहे. कई सम्मान. डेढ़ दशक से प्रतिष्ठित अख़बार अमर उजाला के समूह सलाहकार नए माध्यमों पर कुछ अनूठे प्रयोगों में व्यस्त.
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Book Details
- Publisher
- Unbound Script
- Edition
- 1st
- ISBN
- 9789348497475
- Year
- 2025
- Format
- Paperback
- Pages
- 105
- Language
- English