Ek Karod Ka Joota
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मोती अवतारमणि को उनके पिता, गोपाल यशवंतराय अवतारमणि ने बचपन में सफ़ेद रंग के एक कीमती जूते के जोड़े
के बारे में बताया था, जिसमें उन्होंने हीरे छिपाकर रखे थे। दिवाली की रात,
जिस दिन उनके पिता उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चले गए, उन्होंने वही सफ़ेद जूते पहने हुए थे।
किसी ने कहा कि गबन करने की वजह से वे कहीं छिपे हुए थे,
तो किसी ने कहा कि उनकी मौत बहुत पहले ही हो चुकी थी।
– गोपाल यशवंत अवतारमणि कहाँ गायब हो गए थे?
– वे ज़िंदा थे या मर चुके थे?
ऐसे रहस्यमयी सवालों का जवाब सिर्फ़ सुरेंद्र मोहन पाठक का उपन्यास 'एक करोड़ का जूता' ही दे सकता है।
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