Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi + Jeete Jee Allahabad + Dibiya (डिबिया) + Muhar (मुहर) – Combo Book Set of 4

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Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi - विनोद कुमार शुक्ल के इस उपन्यास में कोई महान घटना, कोई विराट संघर्ष, कोई युग-सत्य, कोई उद्देश्य या संदेश नहीं है क्योंकि इसमें वह जीवन, जो इस देश की वह ज़िंदगी है जिसे किसी अन्य उपयुक्त शब्द के अभाव में निम्न-मध्यवर्गीय कहा जाता है, इतने खालिस रूप में मौजूद है कि उन्हें किसी पिष्टकथ्य की ज़रूरत नहीं है। यहाँ खलनायक नहीं हैं किंतु मुख्य पात्रों के अस्तित्व की सादगी, उनकी निरीहता, उनके रहने, आने-जाने, जीवन-यापन के वे विरल ब्यौरे हैं जिनसे अपने-आप उस क्रूर प्रतिसंसार का एहसास हो जाता है जिसके कारण इस देश के बहुसंख्य लोगों का जीवन वैसा है जैसा कि है।

Jeete Jee Allahabad - जीते जी इलाहाबाद सिर्फ संस्मरणात्मक कृति नहीं है, एक यात्रा है जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास नहीं लिखा जा सकता और जो उस समय के इलाहाबाद के मन-प्राण होते थे।

Dibiya - उदय प्रकाश की छोटी कहानियों के इस चयन में भी उनके कथावैशिष्ट्य के सभी तत्व सहज गतिमान दिखते हैं। जादू, मार्मिक स्मृतियाँ, विडंबना बोध और व्यंग्य उनकी इन कहानियों में एक कौंध की तरह आते हैं और पाठक की चेतना को प्रकाशित कर जाते हैं। माँ, पिता, भाई और मित्रों से आत्मीय किंतु जटिल रिश्तों की कई परतें इन कहानियों की संवेदना भूमि को बनाती हैं। उदय प्रकाश के पास, स्मृतियों और बाहरी संसार के जादू भरे वर्णन की एक ऐसी अद्वितीय भाषा है जो उन्हें गल्प के माहिर कारीगरों के बीच रखती है। अवसरवाद से उपजी गुलाम मानसिकता और यांत्रिकता जहाँ मनुष्य को दयनीय बना रही है वहीं दूसरी ओर अकेला भी कर रही है ।यहाँ अपने में खोया हुआ बचपन भी उतना ही सच्चा है जितनी प्रमाणिक मृत्यु की आहटें हैं।

Muhar - रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।

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Book Details

Publisher
Combo
ISBN
Diwali_Combo_16
Year
2026
Format
Paperback
Pages
640
Language
Hindi
100% Original Books Every title is sourced from trusted publishers.
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