Bharat Ka Vanyajeevan Itihas
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भारत के वन्यजीवों में तेजी से आ रही कमी और उनकी मौजूदा दुर्दशा अक्सर सुर्खियों में रहती है। यह किताब सवाल उठाती है कि हम इस स्थिति तक कैसे पहुँचे, और भारतीय वन्यजीवों के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ और संक्षिप्त विवरण प्रदान करती है। इस किताब की आसान और स्पष्ट भाषा-शैली इस ज्ञानवर्धक ऐतिहासिक विवरण को आम पाठकों के लिए सुगम बनाती है। विशेषज्ञ और विद्वान इसमें जानकारियों का एक विशाल भण्डार पायेंगे।
संस्मरणों, अभिलेखागारों और सरकारी अभिलेखों का सहारा लेते हुए महेश रंगराजन भारत में इंसान और प्राकृतिक दुनिया के बीच सदियों से चले आ रहे टकराव पर नये दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। इस किताब का मुख्य केन्द्र बिन्दु भारतीय वन्यजीवों के इतिहास की प्रमुख घटनाएँ हैं जिनमें उनका संरक्षण और उनकी तादाद में हो रहे क्षय दोनों ही शामिल हैं। प्राचीन और मध्यकालीन युगों पर आधारित अध्याय भारत के शुरुआती वन्यजीव-इतिहास की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं। इसके बाद पिछली दो शताब्दियों के दौरान मानवीय अतिक्रमण के सामने प्रकृति के पीछे हटने की प्रक्रिया, और इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए किये गये प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गयी है।
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Book Details
- Publisher
- Vani Prakashan
- ISBN
- 9788169813013
- Year
- 2026
- Format
- Paperback
- Language
- Hindi