Santhosh Aechikkanam Ki Ikkis Kahaniyan
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जिजीविषा सन्तोष एच्चिक्कानम की कहानियों में एक अहम अवयव है। मनुष्य मरणशील है। जीवन की इस प्राकृतिक सीमा के बारे में वह जानता है। फिर भी वह संघर्ष करता है। अपने अस्तित्व के लिए, अपने सपनों के लिए और अपनी अवांछित अवस्था को बदलने के लिए। उसका संघर्ष निरे भौतिक अर्थों में सिर्फ जीवित रहने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ जीवन की सार्थकता को सुनिश्चित करने और अपनी रचनात्मकता के जरिये नश्वरता से पार पाने में है। यह जीवन-संघर्ष एच्चिक्कानम की कहानियों में बहुविध रूप में व्यक्त हुआ है।
‘उभय ज़िन्दगी’ से लेकर ‘कोमाला’ तक, इन कहानियों में मानवीय जिजीविषा और बचे रहने की जद्दोजहद को सूक्ष्मता से उकेरा गया है। वस्तुतः ये कहानियाँ मनुष्य की मुक्ति की सम्भावनाओं की तलाश का प्रतिफल हैं। भिन्न-भिन्न कथनों-आख्यानों के रास्तों से होकर, परम्परा की भाव-धारा को धारण किये हुए ये कहानियाँ यथा आवश्यकता परिवर्तन को भी अपनाती चलती हैं।
मलयालम कहानी-साहित्य का एक अवश्य पठनीय संग्रह!
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Book Details
- Publisher
- Rajkamal Prakashan
- Edition
- 1st
- ISBN
- 9789377373368
- Year
- 2026
- Format
- Hardcover
- Language
- Hindi