Halyog
Rs. 66.50
Rs. 95.00
मार्कण्डेय की अब तक असंकलित कहानियों का संग्रह 'हलयोग' व्यवहार रूप में परिणत होकर अब आपके हाथ में है। इस संग्रह में कुल बीस कहानियाँ हैं। इन कहानियों का कोई क्रम नहीं है, कोशिश बस इतनी है कि ग्रामीण यथार्थ और संवेदना से जुड़ी कहानियाँ शुरू में एक साथ हों। ख़ास बात यह कि इसमें उनकी लिखी पहली कहानी ‘ग़रीबों की बस्ती' और अन्तिम, लिखी जा रही कहानी ‘खुशहाल ठाकुर’ संकलित है।
कुल मिलाकर यह संग्रह भी बदलते समय, जीवन और उसके भीतर के प्रतिरोधी स्वर के बीच मार्कण्डेय की ख़ास राजनीतिक और वैचारिक सचेतनता लिए हुए है।
Pickup currently not available
Recommended products for this item
You can get your product within 4-7 days when you order today.