Kavi Nirala
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‘कवि निराला’ पुस्तक हिन्दी आलोचना में आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी भी एक बहुमूल्य देन हैं। आचार्य वाजपेयी ने निराला को ‘शताब्दी का कवि’ और उनके काव्य को ‘शताब्दी काव्य’ कहा था। उन्होंने अपनी सूक्ष्म दृष्टि से निराला के उस महाकवि को खोज लिया था जो गत, आगत और अनागत सभी को एकाकार कर लेता है। टी.एस. इलियट ने भी महान कवि के परिचय में यही कहा था कि महान कवि वह होता है जो आत्मसात् कर, वर्तमान सन्दर्भों में जीता हुआ भावी की पदचाप भी सुन लेता है। आधुनिक हिन्दी कविता का उद्गम भारतेन्दु-द्विवेदी युग से प्रारम्भ होकर छायावाद युग में पहुँचकर नई करवट लेता है और इस युग की कवि चतुष्टयी प्रसाद, निराला, पन्त और महादेवी के चार स्तम्भों पर उस काव्य को गढ़ता है जिसको सांस्कृतिक प्रौढ़ता आगामी कवियों के लिए न केवल आधार बनती है बल्कि उनके अनुकरण और विकास में स्वयं को धन्य मानती है।
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Book Details
- Publisher
- Lokbharti Prakashan
- Edition
- 1st
- ISBN
- 9788180315213
- Year
- 2019
- Format
- Hardcover
- Language
- Hindi