Itihas Chakkra
- Free shipping on orders above ₹499.
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ऐसे नेताओं की कमी बहुत खलती है जो सत्ता की तिकड़मों के बजाय समाज और देश की वास्तविक चिन्ताओं को लेकर न सिर्फ़ सोचने की प्रवृत्ति रखते हों, बल्कि उनमें तमाम परिस्थितियों को एक व्यापक नज़रिए के साथ देखने की क्षमता भी हो।
भारतीय राजनीति में एकाधिक व्यक्तित्व ऐसे रहे हैं जो अपनी वैचारिक उद्यमिता में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखते थे। राममनोहर लोहिया ऐसे ही नेता थे। अपने तकरीबन चार दशकों के राजनीतिक जीवन में वे ज़मीनी हक़ीक़तों के अध्ययन और चिन्तन-मनन में इस तरह व्यस्त रहे कि सत्ता-केन्द्रित राजनीति ने उन्हें बहुत अहमियत नहीं दी। न ही उन्होंने इसके लिए कोई हड़बड़ी दिखाई। और जब देश की निगाह उनकी सामर्थ्य की ओर गई, वे चले गए।
लेकिन उनकी वैचारिक थाती उनके लेखन के रूप में आज भी हमारे पास है, और हम चाहें तो एक सम्पूर्ण तथा न्यायसंगत समाज का विज़न उनके आधार पर गढ़ सकते हैं। इस पुस्तक में हम इतिहास को लेकर उनकी दृष्टि तथा विचारों से अवगत होते हैं। देखने लायक है कि उनकी इतिहास-दृष्टि जन-गण के जीवन को कभी अपने सामने से ओझल नहीं होने देती। उनके शब्द हैं : “इतिहास को बनाने व समझने में एक हानिकारक भूल यह होती है कि आंशिक कौशल को पूर्ण कौशल समझ लिया जाए और संसार के एक भाग की स्थिति को समस्त संसार पर लागू मान लिया जाए। हम इतिहास के अब तक सूखे रेगिस्तान को ऐसी मृग मरीचिकाएँ और सपनों के ऐसे बाग़ न पैदा करने दें कि दिमाग़ को ऐसे बीजों को अंकुरित होते देखने का भ्रम हो जाए जो अभी बोए भी नहीं गए हैं।”
यह पुस्तक लोहिया के इतिहास बोध और दृष्टि की परिचायक है।
Pickup currently not available
Frequently Bought Together
Recommended products for this item
You can get your product within 4-7 days when you order today.
Book Details
- Publisher
- Lokbharti Prakashan
- Edition
- 11th
- ISBN
- 9788180311062
- Year
- 2025
- Format
- Paperback, Hardcover
- Language
- Hindi