Neki Kar, Akhbar Mein Daal
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तमाम दरियाओं की गन्दगी देखकर पता लगता है कि लोग अब दरियाओं में नेकी तो नहीं डालते। कोई वक़्त रहा होगा, जब नेकी दरिया में डाली जाती थी। कोई वक़्त रहा होगा, जब साधु-सन्त प्रवचन करते थे, अब प्रवचनों की मार्केटिंग होती है। रामकथा की मार्केटिंग होती है। राम की मार्केटिंग होती है। राम के चाकर तुलसीदास ने लिखा था कि बड़ी मुश्किल से खाने का इन्तज़ाम हो पाता है, मस्जिद में सोना पड़ता है। अब राम के चाकर एक मस्जिद छोड़, पचास मस्जिद भर की जगह क़ब्ज़ा कर लें। राम की चाकरी और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की नौकरी के रिटर्न इधर समान हो गए हैं। राम की चाकरी में लगे सीनियर लोग भी मर्सिडीज में चल रहे हैं और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की नौकरी में लगे सीनियर लोग भी मर्सिडीज में चल रहे हैं। राम का कारोबार इधर बहुत रिटर्न वाला हो गया है। ग़ौर से देखने पर पता चलता है कि बाज़ार सिर्फ़ वहाँ नहीं है, जहाँ वह दिखाई पड़ता है। बाज़ार वहाँ भी है, जहाँ वह दिखाई नहीं पड़ता है।
बाज़ार के इस छद्म को पकड़ने की चुनौती ख़ासी जटिल है। यह किताब इस छद्म को समझने में महत्त्वपूर्ण मदद करती है। व्यंग्य के लपेटे से कुछ भी बाहर नहीं है, इस कथन की पुष्टि इस किताब में बार-बार होती है।
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Book Details
- Publisher
- Radhakrishna Prakashan
- Edition
- 2nd
- ISBN
- 9788171198511
- Year
- 2008
- Format
- Paperback
- Language
- Hindi