Taki Sanad Rahe
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अब्दुल बिस्मिल्लाह उस जीवन-यथार्थ के कहानीकार हैं, जहाँ छोटी-से-छोटी इच्छा पूरी करने के लिए अथक संघर्ष करना पड़ता है। इस जीवन को व्यापक सामाजिकता के कुलीन विवरणों के बीच पहचानना एक दृष्टि-सम्पन्न रचनाकार का ही काम है। हाशिए पर चल रही सक्रियताओं को रचनाशीलता के केन्द्र में प्रतिष्ठित करते हुए अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपनी कहानियों को आकार दिया है।
‘ताकि सनद रहे’ अब्दुल बिस्मिल्लाह के चार कहानी-संग्रहों—'रैन बसेरा', ‘कितने-कितने सवाल’, ‘टूटा हुआ पंख’ और ‘ज़ीनिया के फूल’ में शामिल रचनाओं का समग्र है। इनमें से बहुत सारी कहानियाँ पाठकों व आलोचकों के बीच चर्चित हो चुकी हैं।
यदि हम मध्य वर्ग और निम्न वर्ग के जीवन का समकालीन यथार्थ पहचानना चाहते हैं तो इन कहानियों में क़दम-क़दम पर ठहरकर हमें ग़ौर से देखना होगा। लेखक ने सामाजिक विकास की आलोचना इस तरह की है कि स्थितियों को जीनेवाले चरित्र पाठक की संवेदना का हिस्सा बन जाते हैं। अलग से यह घोषित करने की ज़रूरत नहीं कि लेखक की प्रतिबद्धता क्या है और उसके सरोकार क्या हैं।
अब्दुल बिस्मिल्लाह की भाषा पारदर्शी है। सहज और अर्थ की त्वरा से भरी। इस सहजता की अन्विति कई बार ऐसे होती है, ‘नाले के इस पार सड़क थी और उस पार जंगल। उन दिनों जंगल का रंग इस क़दर हरा हो गया था कि वह हमेशा काले बादलों में डूबा हुआ नज़र आता था। वहाँ जो एक छोटी-सी, ऊँची-नुकीली पहाड़ी थी, वह घास के ताजिए की तरह लगती थी। उस जंगल में शाजा, सलई, धवा, हर्रा, पलाश, कुसुम और जामुन के पेड़ कसरत से भरे हुए थे। उन दिनों कुसुम के फल तो झड़कर ख़तम हो गए थे, पर जामुन अभी बचे हुए थे। हवा चलती तो काले-काले जामुन भद-भद नीचे गिरते और ऐसा लगता मानो प्यार के रस में डूबी हुई आँखें टपकी पड़ रही हों।'
वस्तुतः इन कहानियों को समग्रता में पढ़ना परिचित परिवेश में भी अप्रत्याशित यथार्थ से साक्षात्कार करने सरीखा है।
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Book Details
- Publisher
- Rajkamal Prakashan
- Edition
- 1st
- ISBN
- 9788126725717
- Year
- 2024
- Format
- Hardcover
- Language
- Hindi