Man aur Manushya/मन और मनुष्य + Dukh-Nirodh/दुख-निरोध

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By Osho • Publisher Combo
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Man aur Manushya/मन और मनुष्य - गौतम बुद्ध ऐसे हैं जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत और भी हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हिमालय बस हिमालय जैसा है। गौतम बुद्ध बस गौतम बुद्ध जैसे। पूरी मनुष्य-जाति के इतिहास में वैसा महिमापूर्ण नाम दूसरा नहीं। गौतम बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है, उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध के माध्यम से जितने लोग जागे और जितने लोगों ने परम-भगवत्ता उपलब्ध की है, उतनी किसी और के माध्यम से नहीं। - ओशो बुद्ध एक ऐसे उत्तुंग शिखर हैं, जिसका आखिरी शिखर हमें दिखाई नहीं पड़ता। बस थोड़ी दूर तक हमारी आंखें जाती हैं, हमारी आंखों की सीमा है। थोड़ी दूर तक हमारी गर्दन उठती है, हमारी गर्दन के झुकने की सामर्थ्य है। और बुद्ध खोते चले जाते हैं--दूर...हिमाच्छादित शिखर हैं। बादलों के पार! उनका प्रारंभ तो दिखाई पड़ता है, उनका अंत दिखाई नहीं पड़ता। यही उनकी महिमा है। और प्रारंभ को जिन्होंने अंत समझ लिया, वे भूल में पड़ गए। प्रारंभ से शुरू करना; लेकिन जैसे-जैसे तुम शिखर पर उठने लगोगे, और आगे, और आगे दिखाई पड़ने लगा, और आगे दिखाई पड़ने लगेगा।

Dukh-Nirodh/दुख-निरोध - ध्यान आँख है
बुद्ध के साथ धर्म ने वैज्ञानिक होने की क्षमता जुटाई। बुद्ध के साथ धर्म वैज्ञानिक हुआ। बुद्ध के साथ विज्ञान की गरिमा धर्म को मिली। इसलिए यह आकस्मिक नहीं है कि आज विज्ञान के युग में जब राम फीके पड़ गए हैं और क्राइस्ट के पीछे चलने वाले भी औपचारिक ही क्राइस्ट का नाम लेते हैं, महावीर की पूजा भी चलती है, लेकिन बस नाममात्र को, कामचलाऊ, बुद्ध की गरिमा बढ़ती जाती है। जैसे-जैसे विज्ञान प्रतिष्ठित हुआ है मनुष्य की आंखों में, वैसे-वैसे बुद्ध की गरिमा बढ़ती गई है। बुद्ध की गरिमा एक क्षण को भी घटी नहीं है। और तो सत्पुरुष पुराने पड़ गए मालूम पड़ते हैं, बुद्ध ऐसा लगता है कि अब उनका युग आया। या शायद अभी भी नहीं आया है, आने वाला है। पगध्वनि सुनाई पड़ती है कि बुद्ध का युग करीब आ रहा है। ओशो

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Book Details

Publisher
Combo
ISBN
Osho_2
Format
Paperback
Pages
720
Language
Hindi
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