Gaban | गबन By Munshi Premchand
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गबन' की नायिका जालपा का बचपन से एक सपना है- उसे माँ के जैसा ही चंद्रहार मिले। इस स्वप्न के इर्द-गिर्द प्रेमचंद भारतीय मध्यवर्ग के पतन की कथा लिखते हैं। जालपा का स्वर्णाभूषणों के प्रति अतार्किक प्रेम नायक रमानाथ को भ्रष्टाचार की ओर इतना ले जाता है कि वह अन्ततः निर्दोषों को सज़ा कराने के लिए झूठा सरकारी गवाह तक बनने को तैयार हो जाता है; यह 'गबन' की कथा है। इसके बीच ऐसे अनेक चरित्र और उनके जीवन प्रसंग हैं जो सहज मानवीय ढंग से उच्चता और अवनति की ओर यात्रा करते दिखाई देते हैं। इससे 'गबन' बस आभूषण प्रेम के दुष्परिणामों का आख्यान नहीं रह जाता- मानवीय गरिमा और सामाजिक परिवर्तन के उच्च आदर्शों का दस्तावेज बन जाता है।
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Book Details
- Publisher
- Unbound Script
- Edition
- 1st
- ISBN
- 9788119745630
- Year
- 2025
- Format
- Paperback
- Pages
- 327
- Language
- Hindi