{"product_id":"paandaan-पानदान","title":"Paandaan | पानदान","description":"\u003cp\u003eपानदान’ — सिर्फ़ पान का सामान रखने की एक छोटी संदूक़ची नहीं, बल्कि एक ख़ानदानी विरासत है, जो पीढ़ियों से गुज़रते हुए मुमताज़ बेगम तक पहुँची है। यह अफ़साना एक औरत की उस नाज़ुक पर मज़बूत दुनिया की कहानी है, जो अपने हिस्से की इज़्ज़त, रुतबा और औलादों की परवरिश को उसी सलीके से सँभालती है, जैसे वह अपने पानदान को।\u003cbr\u003e\nमुमताज़ बेगम का जीवन उन तमाम औरतों का प्रतीक है, जो समय और हालात की मार झेलते हुए भी अपने भीतर की गरिमा और अपनापन नहीं खोतीं। मुज्तबा ख़ान ने इस दास्तान को उस दौर के पूरे सामाजिक परिवेश, उसकी भाषा और रवायतों समेत हमारे सामने ज्यों का त्यों रख दिया है।\u003cbr\u003e\nहर किरदार में मुहब्बत और इंसानियत की खुशबू है। भाषा में पुराने लखनऊ की नफ़ासत और क़िस्सागोई का ऐसा रंग है कि कहानी शुरू होते ही पाठक उस दुनिया में उतर जाता है — और आख़िरी पंक्ति तक वहीं ठहर जाना चाहता है।\u003c\/p\u003e\n\n\n\u003cp\u003eलेखक परिचय:\u003cbr\u003e\nमुज्तबा ख़ान प्रसिद्ध पटकथा लेखक और लोकप्रिय भाषा-शिक्षक हैं, जो अपनी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, इंसानी रिश्तों और सांस्कृतिक विरासत को बारीकी से पिरोते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49941096005874,"sku":"9789348497673","price":139.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789348497673.jpg?v=1787048968","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/paandaan-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}