{"product_id":"dinkar94","title":"Dinkar","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eदिनकर जी जब काव्य के क्षेत्र में आए, उस समय हिन्दी में कविता की दो धाराएँ बहुत ही स्पष्ट थीं। एक धारा छायावादी काव्य की थी, जिस पर आक्षेप यह था कि वास्तविकता से ईषद् दूर है। दूसरी धारा राष्ट्रीय कविताओं की थी जो वास्तविकता की अत्यधिक आराधना करने के कारण कला की सूक्ष्म भंगिमाओं को अपनाने में असमर्थ थी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eदिनकर जी ने काव्य-पाठकों का ध्यान विशेष रूप से इसलिए आकृष्ट किया कि उन्होंने कला को वास्तविकता के समीप ला दिया, अथवा यों कहें कि राष्ट्रीय धारा की कविताओं में उन्होंने कला की सूक्ष्मातिसूक्ष्म भंगिमाएँ उत्पन्न कर दीं। दिनकर जी में शक्ति और सौन्दर्य का जो मणिकांचन-संयोग दिखाई पड़ा, वही उनकी कीर्ति का आधार बना।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eप्रस्तुत कृति दिनकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विशद् रूप में प्रकाश डालनेवाली हिन्दी में अपने ढंग की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक में हिन्दी के अधिकारी लेखकों ने दिनकर जी की कृतियों पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए हैं—दिनकर-साहित्य के जिज्ञासु पाठकों तथा छात्रों के लिए सर्वथा संग्रहणीय।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49911047028978,"sku":"DINKAR94","price":122.5,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/Dinkar.webp?v=1789644293","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/dinkar94","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}