{"product_id":"brahma-patra-musafir-cafe-deewar-mein-ek-khidki-rahti-thi-gunahon-ka-devta-october-junction-jaun-elia-ek-ajab-ghazab-shayar-6-books-combo","title":"Brahma – Patra, Musafir Café, Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi, Gunahon Ka Devta, October Junction \u0026 Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar | 6 Books Combo","description":"\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eBrahma – Patra - \u003c\/strong\u003eक्या प्रेम वापस लौटता है ? क्या पत्रों के जवाब आते हैं ? क्या इंतज़ार कभी ख़त्म होता है ? जीवन-मृत्यु के अनेक सोपानों के पार जाती एक प्रेमकथा जो अपनी अंतर्यात्रा में जितनी सम्पूर्ण है, अपनी प्रतीक्षा में उतनी ही अधूरी । मीनाक्षी और धार्मिक की मार्मिक कहानी जो एक लाइब्रेरी में शुरू हुई, एक प्रेमपत्र से आगे बढ़ी और ब्रह्म-पत्र बनकर अमर हुई। प्रेम और बिछोह की युगों-युगों तक चलती कहानी जहाँ नियति भी एक पात्र है, नदी भी !\u003c\/p\u003e\n\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eMusafir Café - \u003c\/strong\u003eहम सभी की जिंदगी में एक लिस्ट होती है। हमारे सपनों की लिस्ट, छोटी-मोटी खुशियों की लिस्ट। सुधा की जिंदगी में भी एक ऐसी ही लिस्ट थी। हम सभी अपनी सपनों की लिस्ट को पूरा करते-करते लाइफ गुज़ार देते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eDeewar Mein Ek Khidki Rahti Thi -\u003c\/strong\u003e विनोद कुमार शुक्ल के इस उपन्यास में कोई महान घटना, कोई विराट संघर्ष, कोई युग-सत्य, कोई उद्देश्य या संदेश नहीं है क्योंकि इसमें वह जीवन, जो इस देश की वह ज़िंदगी है जिसे किसी अन्य उपयुक्त शब्द के अभाव में निम्न-मध्यवर्गीय कहा जाता है, इतने खालिस रूप में मौजूद है कि उन्हें किसी पिष्टकथ्य की ज़रूरत नहीं है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eGunahon Ka Devta\u003c\/strong\u003e - गुनाहों का देवता - धर्मवीर भारती के इस उपन्यास का प्रकाशन और इसके प्रति पाठकों का अटूट सम्मोहन हिन्दी साहित्य-जगत् की एक बड़ी उपलब्धि बन गये हैं। दरअसल, यह उपन्यास हमारे समय में भारतीय भाषाओं की सबसे अधिक बिकनेवाली लोकप्रिय साहित्यिक पुस्तकों में पहली पंक्ति में है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eOctober Junction - \u003c\/strong\u003eचित्रा और सुदीप सच और सपने के बीच की छोटी-सी खाली जगह में 10 अक्टूबर 2010 को मिले और अगले 10 साल हर 10 अक्टूबर को मिलते रहे। एक साल में एक बार, बस। अक्टूबर जंक्शन के ‘दस दिन’ 10\/अक्टूबर\/ 2010 से लेकर 10\/अक्टूबर\/2020 तक दस साल में फैले हुए हैं। \u003c\/p\u003e\n\u003cp data-pm-slice=\"1 1 []\"\u003e\u003cstrong\u003eJaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar - \u003c\/strong\u003eजौन एक मुँहफट, बेबाक और बागी शायर थे। आप समझ लीजिए कि अगर आज की तारीख में वे ज़िंदा होते तो पाकिस्तान में शायद क़त्ल कर दिए जाते। आप जौन को जितना पढ़ेंगे उतना जौन खुलते आएँगे। कुछ दिन में आप इस जौन वाइरस से एडिक्टड हो जाएँगे और एक तिश्नगी आपका शिकार करने लगेगी। \u003c\/p\u003e","brand":"Combo","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67752169865458,"sku":"Diwali_Combo_2","price":975.8,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/UntitledDesign_2.png?v=1792145835","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/brahma-patra-musafir-cafe-deewar-mein-ek-khidki-rahti-thi-gunahon-ka-devta-october-junction-jaun-elia-ek-ajab-ghazab-shayar-6-books-combo","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}