{"product_id":"bharat-nehru-ke-baad-bisaveen-sadi-ke-tanashah-bharat-gandhi-ke-baad-combo-book-set","title":"Bharat Nehru Ke Baad, Bisaveen Sadi Ke Tanashah, \u0026 Bharat Gandhi Ke Baad – Combo Book Set","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBharat Nehru Ke Baad - \u003c\/strong\u003e\u003cspan\u003eभारत नेहरू के बाद, रामचंद्र गुहा की चर्चित और प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी पुस्तक \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-italic\"\u003eIndia After Gandhi\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e का हिंदी रूपांतरण है। यह किताब 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद भारत में हुए राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक बदलावों की सिलसिलेवार और साक्ष्य-आधारित प्रस्तुति है। आज़ादी के बाद के भारत की जटिलता, विविधता और लोकतंत्र की परीक्षा को यह पुस्तक एक गहरी समझ और संतुलन के साथ सामने लाती है। \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eगुहा ने आपातकाल, भाषा और क्षेत्रीय आंदोलनों, मंडल-कमंडल की राजनीति, वैश्वीकरण, सामाजिक न्याय की लड़ाई और आर्थिक सुधारों जैसे अहम विषयों को गंभीर शोध और सहज लेखन शैली के साथ पिरोया है। वे यह भी दिखाते हैं कि किस तरह भारतीय लोकतंत्र ने तमाम आंतरिक विरोधाभासों और चुनौतियों के बावजूद खुद को बार-बार पुनर्निर्मित किया।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBisaveen Sadi Ke Tanashah - \u003c\/strong\u003eतानाशाही एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा का नतीजा होती है या कुछ सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ होती हैं जो किसी एक व्यक्ति के रूप में खुद को प्रकट करती हैं? क्या समाजों और राष्ट्रों के जीवन में कोई ऐसा क्षण आता है जब जन-गण स्वयं आत्मघाती हो उठता है और आँख मूँदकर किसी अधिनायक के पीछे चल पड़ता है?\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eआज इक्कीसवीं सदी के इतने पारदर्शी समय में तानाशाही क्या किसी नए रूप की तलाश करेगी; और इन सवालों की रोशनी में हम, जो दुनिया के लोकतान्त्रिक देशों में अग्रणी रहे हैं, खुद को कहाँ देखते हैं!\u003cstrong\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBharat Gandhi Ke Baad - \u003c\/strong\u003e\u003cspan\u003eभारत गांधी के बाद, रामचंद्र गुहा की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पुस्तक \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-italic\"\u003eIndia After Gandhi\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e का हिंदी रूपांतरण है। यह किताब 1947 के बाद के भारत की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा का सिलसिलेवार और गहराई से किया गया दस्तावेज़ है। आमतौर पर भारतीय इतिहास की किताबें स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित रहती हैं, लेकिन यह पुस्तक बताती है कि आज़ादी के बाद की कहानी उतनी ही चुनौतीपूर्ण, संघर्षपूर्ण और प्रेरक रही है।\u003cbr\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eरामचंद्र गुहा ने धर्म, जाति, भाषा और वर्ग के नाम पर हुए संघर्षों, आंदोलनों और दंगों से लेकर भारतीय लोकतंत्र की मजबूती तक की कहानी साक्ष्यों और शोध के आधार पर बेहद सहज भाषा में प्रस्तुत की है। इसके साथ ही वे उन अनसुने और अनजाने नायकों को भी सामने लाते हैं जिन्होंने जन आंदोलनों, किसान संगठनों और जनजातीय संघर्षों के माध्यम से लोकतंत्र को ज़मीनी स्तर पर मजबूती दी।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Combo","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67765343092978,"sku":"Diwali_Combo_12","price":1117.9,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/Diwali_Sale_11.png?v=1792220481","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/bharat-nehru-ke-baad-bisaveen-sadi-ke-tanashah-bharat-gandhi-ke-baad-combo-book-set","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}