{"product_id":"9789348229403","title":"Prasangvash : Sahitya Aur Samaj ki Chand Bahasen","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक ऐसे लेखों का संग्रह है जो पिछली एक चौथाई सदी से कुछ अधिक समय में भिन्न-भिन्न प्रसंगों तथा अवसरों पर लिखे गए हैं। इन लेखों के विषय नए-पुराने सभी तरह के हैं, लेकिन उन पर चली बहसें नितान्त समकालीन होने के चलते लेखों का सम्बन्ध भी समकालीन वैचारिक परिवेश से है-राजनीति, समाज और साहित्य के अनेक सवाल व्याख्या, पुनर्व्याख्या, दुर्व्याख्या की अनिवार्य प्रक्रियाओं से गुजरते हैं- व्याख्या की राजनीति में हस्तक्षेप ही इन लेखों का मुख्य मकसद है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eपुस्तक के कई लेख पहले भाषण के रूप में सामने आए, बाद को प्रकाशित होने के बाद लेख बन गए। सभी लेख जिन पत्रिकाओं में, जिस साल प्रकाशित हुए, उनका उल्लेख हर लेख के आखीर में कर दिया गया है, भाषणों के सन्दर्भ भी इसी प्रकार दर्ज हैं, कुछेक ऐसे भाषण भी है, जो लेख रूप में प्रकाशित नहीं हुए थे।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":49918218862834,"sku":"9789348229403","price":206.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789348229403.webp?v=1787563155","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/9789348229403","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}