{"product_id":"9789347265372","title":"Hansa Ke Bain","description":"\u003cp\u003e\u003cem\u003eवैर नहीं\u003c\/em\u003e\u003cem\u003e,\u003cspan\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/em\u003e\u003cem\u003eप्रीत नहीं\u003c\/em\u003e\u003cem\u003e,\u003cspan\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/em\u003e\u003cem\u003eफिर भी यह थकन\u003c\/em\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cem\u003eकिसकी भूल भोग रहा\u003c\/em\u003e\u003cem\u003e,\u003cspan\u003e \u003c\/span\u003e\u003c\/em\u003e\u003cem\u003eमेरा ही यह मन\u003c\/em\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eयह संगीत की लहरियों में डूबती-उतराती भाषा में लिखे बेहद कोमल भाव हैं। पंडित अमरनाथ जी, जिन्हें हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के शीर्षस्थ गायकों में गिना जाता है; वे लिखते भी थे। लय के मनन के साथ आंतरिक अनुभूति और संगीत में महसूस होते असीम के साहचर्य से निकले ये शब्द, जीवन के शाश्वत दुख और सर्जना के सुख से ओतप्रोत हैं। उन्हें जितना पढ़ना है, उससे कहीं ज़्यादा महसूस करने की ज़रूरत है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003e‘सुख घिनौने दुख सलोने’—जब कोई साधक यह कहता है तो वह कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, जग को जैसा वह है, वैसा देखकर, समझकर की गई जीवन की समीक्षा है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eआगे एक पंक्ति वे और कहते हैं कि ‘सुख के कारण दुखिया होते देखे अगणित ज्ञानी’, तो सुख और दुख की उस पहेली में ज्ञान की अभिमानी भूमिका भी प्रश्नांकित हो जाती है। वह ज्ञान जो कहता है कि मैं ही सब जानता हूँ, मुझे महसूस करने की आवश्यकता नहीं।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eलेकिन अन्तस के अनुभव बिना ज्ञान भी कहाँ पूरा होता है। सूखे ज्ञानवालों का तो कुछ इसी तरह होता है कि,\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eबिन छाने डीक गए\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eबूँद-बूँद ख़ून की\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eवो जो पीते रहे\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eपानी तक छान के।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49911129735410,"sku":"9789347265372","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789347265372.webp?v=1789207597","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/9789347265372","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}