{"product_id":"9788183611596","title":"Sunhu Tat Yah Akath Kahani","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eकहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eइस पुस्तक में शिवानी की आत्मवृत्तात्मक ‘सुनहु तात यह अकथ कहानी’ और ‘सोने दे’ शीर्षक के लेख शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":49918268113138,"sku":"9788183611596","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788183611596.webp?v=1789985411","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/9788183611596","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}