{"product_id":"9780143450702","title":"SAVARKAR: EK BHULE-BISRE ATEET KI GOONJ 1883-1924","description":"\u003cp\u003eआज के भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली विचारधारा हिंदुत्व के बौद्धिक आधार के रूप में विनायक दामोदर सावरकर निस्संदेह बीसवीं सदी के सबसे विवादास्पद राजनीतिक चिंतकों और नेताओं में से एक हैं। उनके घटनापूर्ण और संघर्षपूर्ण जीवन का वर्णन कभी अत्यधिक प्रशंसात्मक जीवनियों के रूप में किया गया, तो कभी उन्हें पूरी तरह नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। हमेशा की तरह सत्य इन दोनों अतियों के बीच कहीं स्थित है और दुर्भाग्य से अब तक उसे पूरी तरह सामने नहीं लाया गया है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eसावरकर और उनकी विचारधारा महात्मा गांधी, उनके अहिंसावादी दर्शन तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे प्रबल और मुखर विरोधियों में शामिल रहे। एक कथित नास्तिक और कट्टर तर्कवादी के रूप में, जिन्होंने रूढ़िवादी हिंदू मान्यताओं का विरोध किया, अंतरजातीय विवाह और सहभोज को प्रोत्साहित किया तथा गाय की पूजा को महज़ अंधविश्वास माना—सावरकर को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के पूरे दौर में हिंदू समुदाय की ओर से उठने वाली सबसे मुखर राजनीतिक आवाज़ों में से एक माना जाता है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eलंदन में कानून की पढ़ाई के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय होने और भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय जनमत जुटाने के प्रयासों से लेकर उनकी गिरफ्तारी तक, सावरकर का जीवन अत्यंत उथल-पुथल भरा रहा। उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया, जिसे अनुचित माना गया, और उन्हें अंडमान की कुख्यात सेल्युलर जेल में भेज दिया गया। वहाँ उन्होंने एक दशक से भी अधिक समय तक कैद और असहनीय यातनाएँ झेलीं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर अपने लेखन में हिंदू-मुस्लिम एकता के आशावादी समर्थक रहे सावरकर के विचारों में ऐसा क्या परिवर्तन आया कि सेल्युलर जेल में रहते हुए वे ‘हिंदुत्व’ के समर्थक बन गए, जिसमें मुसलमानों के प्रति संदेह का भाव दिखाई देता है?\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eभारत और विदेशों के विभिन्न अभिलेखागारों से प्राप्त बड़ी संख्या में मूल दस्तावेज़ों के आधार पर लिखी गई यह दो-भागों वाली जीवनी सावरकर के जीवन और विचारों को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। इसका पहला भाग उनके कारावास और अंततः ‘कालापानी’ से रिहाई तक के वर्षों पर केंद्रित है। यह पुस्तक सावरकर को उनके जीवन की उपलब्धियों और कमियों—दोनों के साथ—एक मनुष्य के रूप में समझने का प्रयास करती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Penguin Swadesh","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50515199328498,"sku":"9780143450702","price":495.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9780143450702.avif?v=1790067252","url":"https:\/\/booksbunnii.com\/products\/9780143450702","provider":"BOOKS BUNNII","version":"1.0","type":"link"}