{"title":"Poetry","description":"","products":[{"product_id":"9789381394991","title":"Banaras Talkies | बनारस टॉकीज़ by Satya Vyas","description":"\u003cp\u003eबोकारो स्टील सिटी, झारखंड में जन्मे सत्य व्यास को बचपन से बताया गया कि पढ़ाई-लिखाई अच्छी चीज़ है। उन्होंने इस बात को इतने गंभीरता से लिया कि आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मैनेजमेंट, लॉ आदि सब पढ़ डाला। लॉ स्कूल (BHU) के एलुमनाई सत्य व्यास एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में लॉजिस्टिक्स प्रोफेशनल हैं। पढ़ाई के बाद लिखाई का भूत चढ़ा है और ऐसा चढ़ा है कि दो किताबों, कुछ आर्टिकल्स और कई थीसिस की घोस्ट-राइटिंग कर चुके हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eफिलहाल सत्य व्यास, पत्नी प्रियंका और बेटे सात्विक के साथ कोलकाता में रहते है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850121912562,"sku":"9789381394991","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789381394991.jpg?v=1787139141"},{"product_id":"9789384419752","title":"The Chirkuts","description":"\u003cp\u003e\"अगर कुछ नहीं, तो कॉलेज हमें ज़िंदगी भर के लिए दोस्त ज़रूर दे जाता है।\"\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eयह कहानी चार दोस्तों की है, जिनकी प्यार को लेकर सोच एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। लेकिन जब वे खुद प्यार में पड़ते हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि कॉलेज की दुनिया और कॉलेज के बाहर की दुनिया में बहुत अंतर है। और यहीं से शुरू होता है उनका संघर्ष—प्यार का संघर्ष, ज़िंदगी की \"प्रैक्टिकल्स\" का संघर्ष, असाइनमेंट्स का दबाव, प्रोफेसरों की सख्ती और समाज की अपेक्षाओं से जूझने का संघर्ष।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eये चारों दोस्त साथ मिलकर प्यार को महसूस करने और उसे पाने की एक अनोखी यात्रा पर निकलते हैं। यह सफर उन्हें कई अनुभवों, चुनौतियों और यादों से गुज़ारता है, और इसी सफर में वे बन जाते हैं—'द चिरकुट्स'\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123026674,"sku":"9789384419752","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419752.jpg?v=1787136159"},{"product_id":"9789387464186","title":"Kulhad Bhar Ishq: Kashishq","description":"\u003cp\u003eकोशलेन्द्र मिश्र\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइनका नाम, कोशलेन्द्र मिश्र इनके दादा रामकुमार मिश्र, जो ब्रह्म विद्या मंदिर संस्कृत महाविद्यालय वृंदावन में प्राचार्य थे, द्वारा प्रदत्त है। इनके दादा की कर्मस्थली वृंदावन ही इनकी जन्मस्थली है। उम्र इतनी कम कि अभी ये 22 साल के भी नहीं हुए हैं। इनकी माता मोदमणी मिश्रा एक कुशल गृहमैनेजर हैं। इनके पिता, डॉ. भूपेन्द्र कुमार मिश्र एक राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं और उनके ही विषय हिन्दी को अपना बनाकर ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई करने जा रहे हैं। इन्होंने अपना बी.ए. (हिन्दी ऑनर्स) और बी.एड. (भाषा समूह) भी बी.एच.यू. से ही पूरा किया है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइनकी बारहवीं तक की शिक्षा दो चरणों में सम्पन्न हुई। कक्षा एक से पाँच तक की शिक्षा इनके पड़ोस के गाँव के स्कूल से और कक्षा छह से बारहवीं तक प्रेम जागृति विद्यापीठ, देवरिया से, जो एक ओजस्वी संन्यासी के तपोबल से अनैतिकताप्रूफ है। इनका मानना है कि इनका लेखन महज़ एक संयोग नहीं, वरन् यह इनके परिवार की तीन पीढ़ियों की भाषा-साधना के नो बॉल से मिली फ्री हिट है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123452658,"sku":"9789387464186","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464186.jpg?v=1787134540"},{"product_id":"9789387464308","title":"Tumhare Baare Mein","description":"\u003cp\u003eमैं उस आदमी से दूर भागना चाह रहा था जो लिखता था। बहुत सोच-विचार के बाद एक दिन मैंने उस आदमी को विदा कहा जिसकी आवाज़ मुझे ख़ालीपन में ख़ाली नहीं रहने दे रही थी। मैंने लिखना बंद कर दिया। क़रीब तीन साल कुछ नहीं लिखा। इस बीच यात्राओं में वह आदमी कभी-कभी मेरे बग़ल में आकर बैठ जाता। मैं उसे अनदेखा करके वहाँ से चल देता। कभी लंबी यात्राओं में उसकी आहट मुझे आती रही, पर मैं ज़िद में था कि मैं इस झूठ से दूर रहना चाहता हूँ। इस बीच लगातार मेरे पास फ़ोन था, जिससे मैं यात्राओं में तस्वीरें खींचता रहा। फिर किसी बच्चे की तरह यहाँ-वहाँ देखकर कि कहीं वह आदमी आस-पास तो नहीं है? मैं अपने फ़ोन में नोट्स खोलता और ठीक उस वक़्त का जो भी महसूस हो रहा है, जिसे मैं छू भी सकता हूँ, दर्ज कर लेता। इन दस्तावेज़ों को उस वक़्त खींची तस्वीरों के साथ इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर देता। मानो अंतरिक्ष में संदेश छोड़ा हो। शायद मैं इस तरह का लिखना बहुत समय से तलाश रहा था, जो न कविता है, न कहानी है, वह बस उस वक़्त की सघनता का एक चित्र है जिसमें पतंग बिना धागे के उड़ रही है।\u003cbr\u003e\nइस किताब में यात्राएँ हैं, नाटकों को बनाने का मुक्त अकेलापन है, कहानियाँ हैं, मौन में बातें हैं, इंस्टाग्राम की लिखाई है और लिखने की अलग-अलग अवस्थाएँ हैं। एक तरीक़े का बाँध था, जिसका पानी कई सालों से जमा हो रहा था। इस किताब में मैंने वह बाँध तोड़ दिया है।---- मानव कौ\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123682034,"sku":"9789387464308","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464308.jpg?v=1787132760"},{"product_id":"9789384419998","title":"Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar","description":"\u003cp\u003eयूपी के ग़ाज़ियाबाद से ताल्लुक रखने वाले चाणक्य सिंहगोहिल का असली नाम आशुतोष यादव है। पेशेवर रूप से हिंदी के समाचारिक मंचों में लगे लेकिन इनका दिलो-दिमाग़ व्यावहारिक के इतरता इसी रचनात्मकता में रहता है। एक इंजीनियरिंग कॉलेज से असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eगृह कार्यों करने के शौक़ीन एवं चलचित्र-निर्माण में दिलचस्पी भी रखते हैं। ये अपनी ज़िंदगी में एक समझदार इंसान होने पर विश्वास रखते हैं कि उनकी सबसे बड़ी हार से डर होता है। अमूमन तीन चीज़ों से नफ़रत करते हैं—समझौते करने में, बातों के फूहड़पन से और “चैनल पॉलिटिक्स”।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइनसे एक अदद अच्छे कवितावाचन या गपें हम कभी भी मिलाने के इच्छुक माहिर हो सकते हैं। आप इन्हें 7417969482 पर कभी भी कॉल कर सकते हैं\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124108018,"sku":"9789384419998","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419998.jpg?v=1786704331"},{"product_id":"9789384419837","title":"Nadi Ab Maun Hai","description":"\u003cp\u003eनदी मौन है\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e‘नदी मौन है’ सुधी कवयित्री रचना शर्मा का तीसरा संग्रह है। अंतर-पाठ उनके सहृदय चित्त की बानगी देने वाला संग्रह था, तो नींद के हिस्से में कुछ रात भी आने दो स्त्री-मन की भावनाओं का सशक्त अभिव्यक्ति-पत्र, जिसमें छोटी-छोटी रचनाओं के माध्यम से वे प्रश्नाकुलता के साथ जीवन-जगत के अपने अनुभवों को संवेदना की शीतल पाटी पर उकेरती हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइस संग्रह में कवयित्री का मन पर्यावरण और प्रकृति के साहचर्य में अपनी कल्पना के ताने-बाने बुनता है, तो जीवन में सहज ही आयत्त प्रेम की कल्पनाओं में डूबता भी है। जीवन जितना प्रकृति से दूर होता जा रहा है, उतना ही प्रेम से रिक्त होता जा रहा है। ये कविताएँ जीवन को प्रेम और प्रकृति के साहचर्य से संवलित करने का उपक्रम हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइन कविताओं में स्त्री की तमाम कोमल अभिलाषाएँ हैं—प्रीत की डोर में बंधने से लेकर नदियों के कूल-किनारे, प्रकृति के मंडप तले परिणय रचाने की उत्कंठा तक। कभी किसी कवयित्री ने लिखा था—\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e“मत गूँथो मेरा हीरक मन\u003cbr\u003e\nअपनी कोमल बरजोरी से,\u003cbr\u003e\nनयनों की रेशम-डोरी से।”\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eये कविताएँ उन मनकों की तरह हैं, जिन्हें एक कवयित्री ने अपने चित्त की रेशम-डोरी में गूँथ रखा है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e‘नदी मौन है’ केवल शीर्षक ही नहीं, बल्कि आज के तन्वंगी, ग्रीष्म-विरल गंगा वाले दौर में नदी की ख़ामोशी और खिन्नता का इज़हार भी है। जिस तरह बाँधों और बाधाओं से नदियों की गति अवरुद्ध है, उसी तरह स्त्रियों की अभिव्यक्ति के सम्मुख भी अनेक गतिरोध हैं। ‘नदी मौन है’ इन प्रतिकूलताओं के प्रति एक प्रत्याख्यान है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124304626,"sku":"9789384419837","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419837.jpg?v=1787054688"},{"product_id":"9789387464889","title":"Agyaatwaas","description":"\u003cp\u003eजाने क्या आकर्षण था अथर्व में जो मंजुला जैसी सुदृढ़ और प्रखर युवती को अपनी ओर खींचे जा रहा था। शायद अथर्व से मिलकर मंजुला की तलाश मुकम्मल हो गई थी। पीली पड़ चुकी सफ़ेद प्यालियों में चाय की चुस्कियों के साथ, एक टपरीनुमा पार्टी ऑफ़ि‍स की छत तले br\u0026gt;मिस मंजुला गर्ग का प्यार परवान चढ़ता रहा। समाज के लिए एक आदर्श सोच रखने वाले अथर्व और उन्हें ज़मीनी स्तर पर पूरा करने का इरादा रखने वाली मंजुला का साथ परफेक्ट था। तभी तो आँख मूँद उसके पीछे-पीछे चल पड़ी थी वो। उसके सपने लड़कियों के आम सपनों से कुछ अलग थे। एक घिसी-पिटी परिपाटी में ही जीवन जी लेना मंजुला को स्वीकार्य नहीं था। अपने सुंदर, सुनहरे, सार्थक भविष्य की कल्पना में अथर्व को केंद्र मान चुकी थी, उसके हर कार्य में सहयोग करने और जी-जान लगा कर पूरा करने को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मंजुला ने। भले ही उसे एक कठिन चुनाव करना पड़ा था, अपनी घनिष्ठतम स्वरा और अथर्व के बीच, पर उसने अथर्व का आदर्श साथ चुन लिया था। लेकिन कुदरत के भी संतुलन बनाए रखने के अपने अनोखे तरीक़े होते हैं। बरसों पहले की मंजुला और स्वरा में भी मानो रोल रिवर्सल हो गया था। अथर्व वर्मा, स्वरा श्रीवास्तव, डॉ अक्षय तथा सपनों और वास्तविकता के बीच एक सी-सॉ में बैठी मंजुला गर्ग की कहानी है अज्ञातवास।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124468466,"sku":"9789387464889","price":100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464889_7d49b531-1fca-4c98-a6d3-3e81186d4fa4.jpg?v=1787054364"},{"product_id":"9789387464940","title":"Ghazal Hamari Geet Tumhare","description":"\u003cp\u003eमीठे आम तो सबको पसंद होते हैं ही, पर कभी अमिया चखी है आपने, खट्टी-खट्ट? कभी फ़ाइव स्टार की चाँदी की प्याली से ऊबकर चौराहे पर कुल्हड़ की चाय के स की ओर भागा तो होगा मन! कभी तो मॉल्स के चमचमाते शीशों के अंदर से झाँककर सड़क पर खड़े चाट के ठेले पर जाकर अटकी ज़रूर होंगी आपकी आँखें! अगर हाँ, तो बिल्कुल आपके लिए ही है ये किताब। ये इंसान के दिमाग़ के उसी लोचे की उपज है, जो लोचा अक्सर और अचानक सब कुछ ठीक होते हुए भी बेचैनी बनकर हम सबके अंदर घुमड़ पड़ता है। वही लोचा, जो इंसान के अंदर अधूरापन बनकर कभी आँख में आँसू दे जाता है, तो कभी सुकून बनकर दिल में आराम पहुँचाता है। सुबह से लेकर शाम तक रोज़ी-रोटी और घर की ज़ि‍म्मेदारियों से अलग ही होता है यह दिमाग़ी लोचा। और जब किसी के अंदर ज़्यादा ही बढ़ता है, तो फिर कभी ग़ज़ल बनती है, कभी गीत। ये ग़ज़लें और गीत आपके अपने हैं, अपने लोगों ने लिखे हैं, इनमें अपनापन भी है और अल्हड़पन भी। नए लोगों ने लिखा है, इसलिए नयापन भी है इनमें। एक बार पलटिए ज़रूर इस किताब को।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124992754,"sku":"9789387464940","price":100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464940.jpg?v=1787051402"},{"product_id":"9789387464896","title":"Singapore Navras","description":"\u003cp\u003eसिंगापुर में बसे हुए नौ भारतीय लेखकों की कविताओं का संकलन है ‘सिंगापुर नवरस’। नव अर्थात् नया और नव अर्थात् नौ भी। इस नवरस में नौ (9) लेखकों के मनोभावों और उनके जीवन के अनुभवों का रस समाहित है। जहाँ एक ओर इसमें भावों की कोमलता और मधुरता है तो वहीं दूसरी ओर कठोर यथार्थ की पथरीली राह भी शामिल है। खट्टे-मीठे, कच्चे-पक्के जीवन के अलग-अलग रंगों को समेटे इस नवरस में आपको कहीं-न-कहीं अपनी ज़िंदगी के अक्स नज़र आएँगे। कविताएँ कहीं गुगुदाएँगी, कहीं दिल के किसी तार को छू जाएँगी, कहीं सोचने पर मजबूर कर जाएँगी। शब्दों की शक्ल में ढली भावनाएँ आपके मानस में धीरे-धीरे उतरती चली जाएँगी। पठन करते हुए आपके समक्ष अतीत, वर्तमान और भविष्य के पन्ने करवट लेते हुए दिखाई देंगे। नौ लेखकों की कविताओं से सुसज्जित इस पुस्तक में आपको लेखन शैली के कई अंदाज़ नज़र आएँगे। हर लेखक का जीवन जीने का और उसे देखने का अपना एक अलग नज़रिया है। ठीक इसी प्रकार, हर लेखक की अपनी संवेदनाओं को शब्दों में पिरोने की भी एक विशिष्ट शैली है और यही विविधता इस पुस्तक की विशेषता है जो इसे एक अलग पहचान देती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125484274,"sku":"9789387464896","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464896.webp?v=1786001597"},{"product_id":"9788195128648","title":"Rooh Ke Rang । रूह के रंग","description":"\u003cp\u003e‘रूह के रंग’ की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यही है कि कलात्मकता के परंपरागत मापदंड से हटकर विषयानुरूप, प्रभावोत्पादकता आदि सभी दृष्टियों से एक सार्थक और सुंदर मन को काव्य कौशल का रूप दिया गया है। कविताओं के एक हाथ में उम्मीदें और दूसरे हाथ में जागृति का आह्वान है। कविताओं में मानवता का परिचय समग्र रूप से मिलता है। सभी कविताओं की शैली सरल है और इनमें दुःख, मूक समर्पण, व्यथा, रहस्य, ऊँची ऊठी बुलंद और महत्वपूर्ण आवाज़, सामाजिक चेतना, करूणा, अपनों की थाह और प्रेम आदि सबकुछ पाया जा सकता है। रंग और भाव समाया है काव्यधारा में, काव्य जगत में इन कविताओं का आना एक ईमानदार अभिव्यक्ति है। कविताओं के माध्यम से जीवन के समस्त एहसासों और भावों को पहली काव्य संग्रहनुमा माला में पिरोया गया है, जिसकी सुंगध प्रत्येक रूह तक उतरेगी। कहते हैं कविता का एक घूँट जीवन का घूँट है। कविताओं में जीवन तन्मयता से भरा नज़र आता है जिसमें कड़वे, खट्टे, मीठे कई घूँट हैं। जीवन को प्रेम से स्वीकारा गया है। भावों को सजाने के लिए अनावश्यक अलंकारों का प्रयोग कतई नहीं किया है ना ही कठिन शब्दों को प्रयोग किया है। संप्रेषणता और गेयता इस पुस्तक की शैली की विशेषता है। रूह के रंग मात्र पुस्तक नहीं, एक सघन यात्रा की तरह br\u0026gt;श्वास-श्वास चलती है, एक अनूठे यात्री के सतत स्मरण की तरह कविताएँ मन पर छाप छोड़ती हैं। रूह के रंग मनुष्य का उसके मन से एक अक्षुण्ण संबंध है।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850129580274,"sku":"9788195128648","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195128648.webp?v=1786001817"},{"product_id":"9789392820021","title":"Baatein Bewajah । बातें बेवजह","description":"\u003cp\u003eजीवन, एक स्वप्न है, भय और जिज्ञासा से भरा हुआ।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eशाख़ से कोई पत्ता टूटा। सूनेपन में कोई चिड़िया चहकी। अचानक कुछ याद आया। फिर देर तक सोचते रहे कि ये क्या हो गया। फिर चाहा कि कोई पास होता। किसी से बात कर सकते। एक आवाज़ दी जा सकती। लेकिन रेगिस्तान की ठंडी सुबहें, गर्म-सूनी दोपहरें और चुप शामें गुज़रती गईं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eज़िंदगी जितनी ख़ूबसूरत है, इसके दुख उससे अधिक ख़ूबसूरत निकले। कि छोटे दुखों में सब कुछ भूल सके। चिलम, कहवा, चाय और मद भरे प्याले इन दुखों के साथ आ बैठते। दुख की तन्हाई किसी महफ़िल में बदल जाती रही।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eकुछ भी बेकार नहीं था। कुछ भी कम या ज़्यादा नहीं। न चाहना कम हुई और न इंतज़ार। ऐसे लम्हों में जाना कि कुछ महसूस किया, कुछ सीखा। इससे भी अच्छा हुआ कि कुछ कोसने लिखे। लिखकर आँखें नम कर लीं फिर देर तक हँसते रहे।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eज़िंदगी की हर बात कितनी भी बेवजह हो, वह कविता से अधिक सुंदर होती है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130006258,"sku":"9789392820021","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820021.webp?v=1786001869"},{"product_id":"9789392820373","title":"Batao Manu । बताओ मनु","description":"\u003cp\u003eस्त्री-कविता अभिधा-लक्षणा-व्यंजना की जिन अलग-अलग बुनावटों में उपस्थित है, उसके विश्लेषण से इस समाज की अलग-अलग सरणियों में अलग-अलग ढंग से मुकुलित स्त्री-चेतना के कई रंग उजागर हो सकते हैं और यह भी स्पष्ट हो सकता है कि स्त्रीवाद एकाश्म (मोनोलिथ) नहीं है। अलग-अलग वर्गों-वर्णों-नस्लों से जुड़ी स्रियों की कुछ समस्याएँ तो विशिष्ट हैं ही, पर कुछ विरासतें उसकी साझा भी हैं–देह सबके यहाँ शोषण की आधारपीठिका है और सबकी भाषा के आँचल में जातीय स्मृतियों की वही मूँगफलियाँ बँधी हैं, जिन्हें फाँकते हुए स्त्रियों ने अलग-अलग कोनों से मुक्ति का महास्वप्न देखा, नाली का कीचड़ साफ़ करते हुए चौके की पिढ़िया को पढ़ाई की मेज बनाने का उपक्रम साधते हुए। सुषमा प्रतियोगिता परीक्षा के कई चरण लाँघकर कहीं पहुँची उन स्त्री कवियों में हैं, जिनमें बहनापे की आग बुझी नहीं है। संविधान द्वारा दिखाए गए सपने स्त्री-जीवन की विडंबनाएँ अभी तक नहीं काट पाए, क़ानून अभी भी काग़ज़ का फूल है–इसका प्रतिकार एक अलग तरह की अग्निधर्मा तेजस्विता के साथ इन कविताओं में उजागर है। – अनामिका सिंह\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130104562,"sku":"9789392820373","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820373.webp?v=1786001877"},{"product_id":"9788195106349","title":"Chandpur Ki Chanda । चाँदपुर की चंदा","description":"\u003cp\u003eकुछ साल पहले पिंकी और मंटू का प्रेम-पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और ऐसे वायरल हुआ कि उसे शेयर करने वालों में हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के छात्र भी थे और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी। लेकिन उस छोटे से प्रेम-पत्र के पीछे की बड़ी कहानी क्या थी, यह किसी को नहीं मालूम। क्या था उन दो प्रेमियों का संघर्ष? ‘चाँदपुर की चंदा’ क्या उस मंटू और पिंकी की रोमांटिक प्रेम-कहानी भर है? नहीं, यह उपन्यास बस एक खूबसूरत, मर्मस्पर्शी वायरल प्रेम-कहानी भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समय और हमारे समाज के कई कड़वे सवालों से टकराते हुए, हमारी ग्रामीण संस्कृति की विलुप्त होती वो झाँकी है, जो पन्ने-दर-पन्ने एक ऐसे महावृत्तांत का रूप धारण कर लेती है जिसमें हम डूबते चले जाते हैं और हँसते, गाते, रोते और मुस्कुराते हुए महसूस करते हैं। यह कहानी न सिर्फ़ हमारे अपने गाँव, गली और मोहल्ले की है, बल्कि यह कहानी हमारे समय और समाज की सबसे जरूरी कहानी भी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default 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कॉकटेल है जिसका नशा लंबे समय तक बरक़रार रहता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131054834,"sku":"9788195106387","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195106387.webp?v=1786001979"},{"product_id":"9789392820229","title":"Qitraah । क़ितराह","description":"\u003cp\u003eगृहयुद्ध में तबाह सीरिया वहाँ की स्त्रियों के लिए भयावह यातनाघर बन गया। चोटिल देह और आत्मा लिए भारतीय मूल की एक सीरियाई लड़की भारत आती है। यहाँ उसकी मुलाक़ात भारतीय सेना के उस ऑफ़िसर से होती है, जो आतंकवाद से लड़ने में अपना बहुत-कुछ गँवा चुका है। जीवन के सियाह रंगों से भरे ये दो लोग एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं।\u003cbr\u003e\n‘क़ितराह’ यात्रा में घटित होता गल्प है। वह पहले लड़की और लड़के के जीवन में ‘घट’ चुका है, जो इन दोनों को इस क्रूर ‘घटे’ की गली के अंत तक छोड़ आया है। वहाँ से वापस अकेले लौटने का साहस उनके पास नहीं है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eयह उपन्यास पाठकों को भी पात्रों के साथ यात्रा पर ले जाता है जिसे पढ़ते हुए वो अपने भीतर उन अनजाने, भुला दिए गए सपनों की ओर लौटने लगते हैं, लेखक की सुंदर भाषा और दृष्टि का आश्वासन ख़ुद के कंधों पर लिए। पर जब तक जीवन शेष है, घटित-अघटित सब कुछ लौटकर दस्तक देता ही है, बार-बार..\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131349746,"sku":"9789392820229","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820229.webp?v=1786002021"},{"product_id":"9789392820038","title":"Ruk Jaana Nahin । रुक जाना नहीं","description":"\u003cp\u003eयह किताब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हिंदी मीडियम के युवाओं को केंद्र में रखकर लिखी गई है। इस किताब में कोशिश की गई है कि हिंदी पट्टी के युवाओं की ज़रूरतों के मुताबिक़ कैरियर और ज़िंदगी दोनों की राह में उनकी सकारात्मक रूप से मदद की जाए। इस किताब के छोटे-छोटे लाइफ़ मंत्र इस किताब को खास बनाते हैं। ये छोटे-छोटे मंत्र जीवन में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। इस किताब की कुछ और ख़ासियतें भी हैं। इसमें पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के प्रैक्टिकल नुस्ख़ों के साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट पर भी विस्तार से बात की गई है। चिंतन प्रक्रिया में छोटे-छोटे बदलाव लाकर अपने कैरियर और ज़िंदगी को काफ़ी बेहतर बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए रीडिंग और राइटिंग स्किल को सुधारने पर भी इस किताब में बात की गई है। कुल मिलाकर किताब में कोशिश की गई है कि सरल और अपनी-सी लगने वाली भाषा में युवाओं के मन को टटोलकर उनके मन के ऊहापोह और उलझनों को सुलझाया जा सके। इस मोटिवेशनल किताब में असफलता को हैंडल करने और सफलता की राह पर बढ़ते जाने कुछ नुस्ख़े भी सुझाए हैं। ऐसे 26 युवाओं की सफलता की शानदार कहानियाँ भी उन्हीं की ज़ुबानी इस किताब के अंत में शामिल हैं, जिन्होंने तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद ‘रुक जाना नहीं’ का मंत्र अपनाकर सफलता की राह बनाई और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default 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