{"title":"Literary Fiction","description":"","products":[{"product_id":"9789381394373","title":"Chaurahe Par Seedhiyan | चौराहे पर सीढ़ियाँ (Hindi Story Collection, 14 Stories)","description":"\u003cp\u003e‘चौराहे पर सीढ़ियाँ’ कहानी-संग्रह में सम्मिलित चौदह कहानियाँ एक नयी ख़ुशबू जैसी है। जो पाठक हिंदी कहानी में नवीन प्रयोग और अद्भुत भाषा पढ़ने की चाह रखते हैं, उन्हें यह कहानी-संग्रह अवश्य पढ़ना चाहिए। इस कहानी-संग्रह की शीर्षक कहानी एक रूपक कथा है। इसमें कुछ ऐसे बिंब चुने गए हैं जो निर्जीव हैं। ये बिंब समाज की हर परत में उपस्थित ऊँचे-नीचे और सामान्य स्त्री-पुरुषों का सटीक चित्रण करते हैं। संग्रह में पहली कहानी एक लड़की की डायरी से समाज के भिन्न चेहरों की असलियत को उघाड़ने वाली कहानी है। सभी कहानियों में स्त्री मुख्य पात्र है और उसके दुःख, उसकी अभिलाषाएँ इतनी सहज-सरल हैं कि वे पाठक को अपने आस-पास की मालूम होती हैं। किशोर की कहानियों के पात्र अविश्वसनीय नहीं हैं वरन वे ये कहानियाँ पाठक के सामने एक ऐसे व्यक्ति को ला खड़ा करती हैं जिसे पाठक भली-भाँति जानता है। इन कहानियों में गहरा प्रेम और उससे अधिक गहरी टूटन है। उदासी का गाढ़ा रंग है। भाषा एक सम्मोहन है। पाठक भाषा के प्रवाह में बहता जाता है। जिन पाठकों को प्रेम के आसव में गहरी छलाँग लगानी हो उनके लिए ही ये कहानियाँ हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850121683186,"sku":"9789381394373","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789381394373.jpg?v=1787222895"},{"product_id":"9789381394502","title":"Namak Swadanusar","description":"\u003cp\u003eनमक स्वादानुसार विविध विषयों पर आधारित लघुकथाओं का एक सशक्त संग्रह है। इसकी अधिकांश कहानियाँ लेखक के जीवन, उसके अनुभवों तथा उसके आसपास के परिवेश, स्थानों और व्यक्तियों से प्रेरित हैं। इस संग्रह में सम्मिलित कथाएँ रहस्य और गहन कल्पना से लेकर बचपन की सहज स्मृतियों तक विस्तृत हैं। प्रत्येक कहानी अपनी कथन-शैली, विषय-वस्तु और प्रस्तुति के कारण एक-दूसरे से भिन्न तथा विशिष्ट है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eमनुष्य अपनी कार्यक्षमता, एकाग्रता और दृष्टिकोण को समृद्ध करने के लिए प्रेरणा की खोज अनेक स्रोतों में करता है। यह पुस्तक इस सत्य को स्थापित करती है कि प्रेरणा कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन, अनुभवों और आसपास घटित होने वाली साधारण घटनाओं में ही सहज रूप से विद्यमान है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eनमक स्वादानुसार में संकलित लघुकथाएँ नवीन दृष्टि, मौलिक विचार और संवेदनशील अभिव्यक्ति के साथ पाठकों को जीवन के विविध आयामों से परिचित कराती हैं। यह पुस्तक वर्ष 2013 में हिन्द युग्म द्वारा प्रकाशित की गई थी तथा इसका प्रथम संस्करण पेपरबैक प्रारूप में उपलब्ध हुआ।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eमुख्य विशेषताएँ:\u003c\/p\u003e\n\n \u003cp\u003eहिंदी की 9 उत्कृष्ट लघुकथाओं का संग्रह।\u003cbr\u003e\n प्रत्येक कहानी अपने कथानक, शिल्प और दृष्टिकोण में विशिष्ट।\u003cbr\u003e\n जीवन के सामान्य अनुभवों से असाधारण प्रेरणा प्राप्त करने का संदेश।\u003cbr\u003e\n नवीन संवेदना और ताज़गीपूर्ण लेखन शैली से समृद्ध कथा-संग्रह।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850121715954,"sku":"9789381394502","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789381394502.jpg?v=1787140487"},{"product_id":"9789384419370","title":"Bakar Puran","description":"\u003cp\u003eयह एक साहित्य है जिसमें अभिजातता या सजावटी होने का कोई दबाव नहीं है। न ही हमने कभी नैतिकता की चादर ओढ़ने की कोशिश की है। इस साहित्य का नाम भले ही 'बकर साहित्य' है पर बकवास कुछ भी नहीं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e'बकर साहित्य' हिंदी साहित्य की वो विधा है जो सड़क के पास की चाय के दुकानों, गोलगप्पे के ठेलों, स्कूल-कॉलेज के हॉस्टलों से होते हुए बैचलर लौंडों के उस कमरे पर पहुँचता है जहाँ ग़ालिब है, मोमिन है, ट्रॉट्स्की है, आंद्रे ब्रेतों है और कॉस्मोपॉलिटन का पुराना-सा इशू भी। उसी कमरे में कटरीना की तस्वीर भी है और लियोनार्दो के स्फूमेतो इफेक्ट को बताती किताब भी।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eउस कमरे में झाड़ू नहीं लगी हो, बर्तन गंदे हों लेकिन चार लौंडे जब साथ बैठकर मदिरा का सेवन कर रहे हों, पाँचवा सिर्फ चखना दे रहा हो तो मोदी-ओबामा से लेकर सचिन-गांगुली, निकॉल्सन-डी नीरो, काफ़्का-कम्यू, मंटो-प्रसाद, कबीर-नानक तक पर गहन चर्चा हो जाती है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eबकर साहित्य यहाँ साँस लेता है, स्वच्छंद होकर। यहाँ साहित्यकार नग्न होता है। चाहे वो नशे में हो या होश में, एक-एक बात दुनियावी कपड़ों और रंग-बिरंगे चश्मों के परे करता है। यहाँ आलोचना की जगह है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850122338546,"sku":"9789384419370","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419370.jpg?v=1787137579"},{"product_id":"9789384419707","title":"Ishq Ke Kai Rang","description":"\u003cp\u003eइश्क – बेकरारी, राहत, असीम हर्ष, बेपनाह गम, ऐसे ही कुछ एहसासों का मिश्रण है यह इश्क। हम सब अपने जीवन में एक-न-एक या कई बार इससे रूबरू होते हैं, और हर बार हमें यह नया-सा कर के जाता है।‘इश्क के कई रंग’ प्यार के रंग में सराबोर तीन सुंदर कहानियों का संकलन है, जो आपको भी भिगोने के लिए तैयार है। लेखक के जीवन से प्रेरित ये कहानियाँ आपको भिन्न-भिन्न एहसासों से रूबरू कराते हुए एक सम्पूर्ण यात्रा पर ले जाएँगी। तो देर किस बात की है, इन कहानियों से खुद को जोड़ते हुए आप भी इश्क के समंदर में गोता लगाने के लिए तैयार हो जाइए और देखिए कि आप खुद को इनमें कहाँ पाते हैं! उम्मीद है कहीं-न-कहीं आपके भी दिल के तार छिड़ेंगे। भावुक और रूमानी पाठकों के लिए यह कृति प्रेरक साबित हो सकती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850122895602,"sku":"9789384419707","price":92.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419707.jpg?v=1787136364"},{"product_id":"9789387464254","title":"Chaurasi","description":"\u003cp\u003eसत्य व्यास निर्विवादित रूप से हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में एक हैं। सत्य व्यास की अब तक प्रकाशित पाँचों किताबें—‘बनारस टॉकीज़’, ‘दिल्ली दरबार’, ‘चौरासी’, ‘बाग़ी बलिया’ और ‘उफ़्फ़ कोलकाता’ बेस्टसेलर रही हैं। इन सभी किताबों पर फ़िल्में तथा वेबसीरीज़ निर्माणाधीन हैं। ‘चौरासी’ आधारित वेबसीरीज़ ‘ग्रहण’ साल 2021 में Hotstar पर रिलीज़ भी हो चुकी है। सत्य व्यास हिंद युग्म के ‘लखपति लेखक क्लब’ का भी हिस्सा हैं\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123190514,"sku":"9789387464254","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464254.jpg?v=1787135564"},{"product_id":"9789387464001","title":"Chhori Kamli","description":"\u003cp\u003eरेगिस्तान में रहने वाले घुमक्कड़ लोगों की जीवन शैली, लोकगायन से जुड़ी जातियों का समाज में स्थान और जटिल सामाजिक तानेबाने में उपजे विजातीय प्रेम की गहरी टीस भरी कहानी है, छोरी कमली । इस कहानी में मांगणियार लोकगायक और घुमक्कड़ जोगी लड़की का प्रेम मेरुदंड है और उसके आस-पास रेगिस्तान का जीवन और रेत का बारीक सौंदर्य उकेरा हुआ है। लोकप्रिय कहानीकार किशोर चौधरी की यह कहानी, उनके दूसरे कहानी-संग्रह 'धूप के आईने में' प्रकाशित की गई थी। कहानी 'छोरी कमली' में उकेरे गए रेगिस्तान को पाठकों ने ख़ूब पसंद किया। कालबेलिया नर्तकी कमली के नाच और मांगणियार गायक के सुरों के प्रेम में आलोड़ित हो जाने वाले पाठकों और रेगिस्तान के चाहने वालों के लिए यह कहानी-संग्रह 'छोरी कमली' शीर्षक के साथ पुनः प्रस्तु\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123223282,"sku":"9789387464001","price":100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464001.jpg?v=1787135464"},{"product_id":"9789387464179","title":"Goodbye: Aakhiri Par Ant Nahin","description":"\u003cp\u003eकार्तिक और आरवी दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। कॉलेज में फ्रेशर पार्टी के दौरान आरवी डॉस करती है। उसे देखकर कार्तिक उससे दोस्ती नहीं प्यार करना चाहता है। एक दिन कार्तिक अपनी परेशानियों का बोझ लेकर पार्क में बैठकर सोचता रहता है। तभी एक शख्स आता है और कहता है कि मैं भगवान हूँ, सब परेशानी ठीक कर दूँगा। कार्तिक उसकी तरफ देखता है, और बोलता है, जाओ जाओ! मूड की ऐसी-तेसी मत करो।आरवी के कारण परेशान हो, उस शख्स की आवाज थी। कार्तिक सन्न रह गया उसे कैसा पता चला। कुछ खामोशी के बाद फिर दोनों बातें करने लगते हैं। क्या उस शख्स ने सब कुछ सही कर दिया? क्या उस शख्स के आने के बाद कार्तिक के जीवन मे कुछ बदलाव आया?कार्तिक ने कुछ सपने भी देखे थे। जिनको पूरा करना उसके वश में नहीं है ऐसा वह सोच चुका था। आरवी के आने के बाद उसके सपने में पंख तो लगे थे, लेकिन अब उसे उससे दूर होना है। क्या दूर होकर अपने सपने के पंखों में उड़ान भर पायेगा या लाखों की तरह वो भी 'सपना सपना' कहकर, अपने को कोसकर दुनिया से चला जायेगा?\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123387122,"sku":"9789387464179","price":92.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464179.jpg?v=1787134671"},{"product_id":"9789387464407","title":"October Junction","description":"","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123485426,"sku":"9789387464407","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464407.jpg?v=1786704267"},{"product_id":"9789387464537","title":"Aaj Ka Vijeta","description":"\u003cp\u003e-व्यक्तित्व विकास स्वयं को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम बनाने की वह प्रक्रिया है, जो जीवन को सकारात्मक दिशा में अग्रसर करने की प्रेरणा प्रदान करती है। इसके फलस्वरूप छुपी हुई शक्ति के भंडार का स्रोत निहित रूप से स्पष्ट होने लगता है, सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है और ऊपर व अंदर से आनंद की अनुभूति होना निश्चित ही संभव हो जाता है। -विवेक शक्ति उत्पन्न होकर उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। इसमें शरीर के अंगों के साथ मन में उठने वाले विचार, आचार-व्यवहार, सबको श्रेष्ठ बनाया जा सकता है और एक उत्कृष्ट इंसान की रचना की जा सकती है। -इसकी आवश्यकता साक्षात्कार के समय होगी। तब पूर्ण आत्मविश्वास के साथ कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक स्पष्टता के साथ युक्तियुक्त ढंग से अपने आपको प्रस्तुत कर सकेंगे। -इस पुस्तक में लेखक ने अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर पाठकों का मार्गदर्शन किया है कि कैसे वे अपने व्यक्तित्व का आवश्यवक विकास कर सकते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123714802,"sku":"9789387464537","price":100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464537.jpg?v=1787055770"},{"product_id":"9789387464506","title":"Aughad \/ औघड़","description":"\u003cp\u003eसाहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल 21वीं सदी के नए लेखकों के प्रतिनिधि स्वरूप लेखक हैं। यह सिर्फ इसलिए नहीं कि सामाजिक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर जमीनी रूप से लिखने का हुनर रखते हैं। साहित्य इनके लेखन में सामाजिक विसंगतियाँ, विद्रूपताएँ और आपसी संबंधों बहुत सूक्ष्म रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। लेखक ने अपना बाल्यकालीन और शैक्षणिक जीवन बिहार गाँव रहने वाले नीलोत्पल ने अपने पहले उपन्यास ‘डार्क हॉर्स’ के माध्यम से ग्रामीण भारत के राजनीतिक-सामाजिक चरित्रता की गोट पर अपनी कलम रखी है। ‘औघड़’ नई वाली हिंदी के विमर्श का एक नया विस्तार है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850123780338,"sku":"9789387464506","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464506.jpg?v=1786704423"},{"product_id":"9789387464803","title":"Bahut Door, Kitna Door Hota Hai","description":"\u003cp\u003eएक संवाद लगातार बना रहता है अकेली यात्राओं में। मैंने हमेशा उन संवादों के पहले का या बाद का लिखा था... आज तक। ठीक उन संवादों को दर्ज करना हमेशा रह जाता था। इस बार जब यूरोप की लंबी यात्रा पर था तो सोचा, वो सारा कुछ दर्ज करूँगा जो असल में एक यात्री अपनी यात्रा में जीता है। जानकारी जैसा कुछ भी नहीं... कुछ अनुभव जैसा.. पर ठीक अनुभव भी नहीं। अपनी यात्रा पर बने रहने की एक काल्पनिक दुनिया। मानो आप पानी पर बने अपने प्रतिबिंब को देखकर ख़ुद के बारे में लिख रहे हों। वो ठीक मैं नहीं हूँ... उस प्रतिबिंब में पानी का बदलना, उसका खारा-मीठा होना, रंग, हवा, सघन, तरल, ख़ालीपन सब कुछ शामिल हैं। इस यात्रा-वृत्तांत को लिखने के बाद पता चला कि असल में मैं इस पूरी यात्रा में एक पहेली की तलाश में था... जिसका जवाब यह किताब है। —मानव कौल\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124042482,"sku":"9789387464803","price":160.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464803.jpg?v=1787055531"},{"product_id":"9789384419998","title":"Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar","description":"\u003cp\u003eयूपी के ग़ाज़ियाबाद से ताल्लुक रखने वाले चाणक्य सिंहगोहिल का असली नाम आशुतोष यादव है। पेशेवर रूप से हिंदी के समाचारिक मंचों में लगे लेकिन इनका दिलो-दिमाग़ व्यावहारिक के इतरता इसी रचनात्मकता में रहता है। एक इंजीनियरिंग कॉलेज से असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eगृह कार्यों करने के शौक़ीन एवं चलचित्र-निर्माण में दिलचस्पी भी रखते हैं। ये अपनी ज़िंदगी में एक समझदार इंसान होने पर विश्वास रखते हैं कि उनकी सबसे बड़ी हार से डर होता है। अमूमन तीन चीज़ों से नफ़रत करते हैं—समझौते करने में, बातों के फूहड़पन से और “चैनल पॉलिटिक्स”।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइनसे एक अदद अच्छे कवितावाचन या गपें हम कभी भी मिलाने के इच्छुक माहिर हो सकते हैं। आप इन्हें 7417969482 पर कभी भी कॉल कर सकते हैं\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124108018,"sku":"9789384419998","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789384419998.jpg?v=1786704331"},{"product_id":"9789387464605","title":"Malhaar","description":"\u003cp\u003eजंबूद्वीप की सबसे बड़ी रणगाथा\u003cbr\u003e\nदेवासुर-संग्राम का दूसरा चरण\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e\"मत्स्यराज\" की कहानी अनेक वर्षों में गुंथी होती है, जहाँ प्रथम भाग की समाप्ति हुई थी।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइसका भाग अपूर्व वेश, मुद्रा, सौहार्द तथा ज़हर को संयमित करता हुए आगे बढ़ता है। और कई नई घटनाओं के माध्यम से अश्वस के कष्टकारी सफर को चित्रांकित भी करता जाता 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‘कितने शहरों में कितनी बार’, ‘अंतिमा’, ‘पतझड़’ तथा ‘बहुत दूर, कितना दूर’ पाठकों का अत्यंत प्यार मिला है। यह पुस्तक इनकी गद्य-श्रृंखला का तीसरा उपन्यास भी है\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850124501234,"sku":"9788194653851","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788194653851.jpg?v=1787052799"},{"product_id":"9789387464698","title":"Hazaron Khwahishen","description":"\u003cp\u003eहज़ारों ख़्वाहिशें, इश्क़ और इंक़लाब की एक हैरत अंगेज़ दास्तान है। एक तरह का मॉडर्न एपिक, जिसमें अल्हड़-सी मोहब्बत है, इंक़लाब के शोले हैं, लेफ़्ट-राइट का झमेला है, 90s का नॉस्टैल्जिया है, राजनीतिक बहसबाज़ी है और उन सबके बीच है कास्ट पॉलिटिक्स की धमक। यह उपन्यास मुखर्जी नगर में IAS की तैयारी कर रहे दोस्तों की कहानी ही नहीं कहता, बल्कि आईएएस बनने के पीछे की सोच, आईएएस बनने के लिए दी जाने वाली क़ुर्बानी और तैयारी के बीच की फ्रस्ट्रेशन भी बयाँ करता है। अपन ख़्वाहिशों के लिए जी-जान लगा देने वाले नौजवान इस कहानी के पात्र हैं, जो दिल्ली को और उसकी पॉलिटिक्स को अपनी नज़र से देखते हैं। ये पात्र देश में घटित घटनाओं से प्रभावित होते हैं और उसी के साथ कहानी नये मोड़ लेती रहती है। इन सबके साथ बहुत से फ़िल्मी और साहित्यिक रेफ़रेंस पॉइंट्स भी इस कहानी में शामिल हैं, जो कहानी को न सिर्फ़ मनोरंजक बनाते हैं, बल्कि नये आयाम भी देते हैं। यह हिंदी लेखन में एक नये तरह का एक्सपेरिमेंट है। कहानी के भीतर ढेर सारी परते हैं। कहीं सेल्फ़ रिफ्रेंशियेलिटी, कहीं पोस्ट मॉडरनिस्म, तो कहीं कॉफ़्किस्क एलीमेंट। पर सबसे आकर्षित करने वाली बात है, इस कहानी का फ़िल्मी अंदाज़ में कहा जाना।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125058290,"sku":"9789387464698","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464698.jpg?v=1786965728"},{"product_id":"9789387464957","title":"Ibnebatuti","description":"\u003cp\u003eहोता तो यह है कि बच्चे जब बड़े हो जाते है तो उनके माँ-बाप उनकी शादी कराते हैं लेकिन इस कहानी में थोड़ा-सा उल्टा है, या यूँ कह लीजिए कि पूरी कहानी ही उल्टी है। राघव अवस्थी के मन में एक बार एक उड़ता हुआ ख़याल आया कि अपनी सिंगल मम्मी के लिए एक बढ़िया-सा टिकाऊ बॉयफ्रेंड या पति खोजा जाए। राघव को यह काम जितना आसान लग रहा था, असल में वह उतना ही मुश्किल निकला। इब्नेबतूती आज की कहानी होते हुए भी एक खोए हुए, ठहरे हुए समय की कहानी है। एक लापता हुए रिश्ते की कहानी है। कुछ सुंदर शब्द कभी किसी शब्दकोश में जगह नहीं बना पाते। कुछ सुंदर लोग किसी कहानी का हिस्सा नहीं हो पाते। कुछ बातें किसी जगह दर्ज नहीं हो पातीं। कुछ रास्ते मंज़िल नहीं हो पाते। इब्नेबतूती-उन सभी अधूरी चीज़ों, चिट्ठियों, बातों, मुलाक़ातों, भावनाओं, विचारों, लोगों की कहानी है।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125156594,"sku":"9789387464957","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464957.jpg?v=1786704483"},{"product_id":"9789387464735","title":"Lamhon Ka Safar","description":"\u003cp\u003eसंपूर्ण ग्रामीण और अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ और लेख प्रकाशित। 25 से अधिक नाटक, गीत, लेख, व्यंग्य, निबंध, नाटिका-पुस्तकों से सम्बन्धित रचनाएँ।\u003cbr\u003e\nसर्वसमाज के सबसे बड़े ऑनलाइन दैनिक 'लोकनायक-नामा' से भी जुड़ाव। वर्तमान।\u003cbr\u003e\nयह पहला एकल कविता-संग्रह।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125353202,"sku":"9789387464735","price":100.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464735.webp?v=1786001570"},{"product_id":"9789387464711","title":"Sharten Laagoo","description":"\u003cp\u003eआप कह सकते हैं कि 'शर्तें लागू' नई वाली हिंदी की पहली किताब है। इस किताब में आपके स्कूल में पढ़ने वाली वह लड़की है जिसके बारे में सब बातें बनाते थे। मोहल्ले के वह भइया हैं जो कुछ भी हो जाता था तो कहते थे टेंशन मत लो यार सब सही हो जाएगा। वे अंकल हैं जो कभी आपसे ख़ुश नही होते। ऐसे समझ लीजिए जैसे किसी ने आपकी डायरी लिख दी हो जिसमें कुछ सच हैं, कुछ यादें हैं, पहला प्यार है और आपकी कुछ ऐसी बातें जो केवल आपको ही पता हैं। इस किताब में शामिल सभी 14 कहानियाँ आपके आसपास की ही कहानियाँ हैं।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125451506,"sku":"9789387464711","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464711.webp?v=1786001588"},{"product_id":"9788194653820","title":"Stuti: Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 2","description":"\u003cp\u003eमहाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह दूसरा चरण है। रोहन की वसीयत और उससे जुड़ी रोंगटे खड़े करने वाली वस्तुओं की गुत्थी में उलझे श्रीमंत परिवार को उस रहस्यमय यज्ञ के दर्शन हुए जिसे अदृश्य मुमुक्षुओं ने कुरुक्षेत्र में महाविनाश के उत्सव से दूर अपने त्याग, समर्पण और निष्ठा से श्रीकृष्ण के आदेश पर मानवता के चरणों में समर्पित किया था। किन्तु द्वापरयुग के गर्भ में पोषित वह दिव्य यज्ञ कलयुग में श्रीमंत परिवार के जीवन और मानवता के भविष्य का निर्णायक कैसे बना? उससे रोहन की वसीयत का क्या जुड़ाव था?\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125844722,"sku":"9788194653820","price":319.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788194653820.webp?v=1786001605"},{"product_id":"9789387464612","title":"Tharki","description":"\u003cp\u003eइस किताब में शामिल कहानियाँ पात्रों की अलग-अलग मनोदशा का चित्रण करती हैं। एक सरकारी कर्मचारी की बेबसी को ‘टारगेट’ में देखा जा सकता है। मासूम लड़कियों से हो रही हैवानियत ने विचलित किया तो निम्मो का किरदार पैदा हुआ जो ‘बॉडी पार्ट्स’ में नादानी से भावुकता और फिर डर से निकलकर आक्रोश और आखिर में दिलजमा (कोल्ड ब्लडेड) बनने का सफर तय करती है। ‘काउंसलर’ में पति और पत्नी दोनों ही अपनी जगह सही हैं, बस उन्हें एक दूसरे को समझने के लिए सेतु की आवश्यकता होती है। ‘क्लर्क’ और ‘ठरकी’ की रचना हलके-फुलके अंदाज में या मस्ती भरे मूड में की गई है। किताब की अन्य कहानियाँ भी जीवन में व्याप्त विसंगतियों को दर्शाती हैं। हमारे व्यक्तिगत जीवन में, परिवार में और समाज में कितनी ही विसंगतियाँ देखने को मिलती है। शायद ये विसंगतियाँ ही होती हैं जो एक लेखक के लिए ड्राइविंग फोर्स का काम करती हैं।.\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125877490,"sku":"9789387464612","price":96.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789387464612.webp?v=1786001614"},{"product_id":"9788194653837","title":"Uff Kolkata","description":"\u003cp\u003e‘उफ़्फ़ कोलकाता’ हिंदी भाषा की पहली हॉरर कॉमेडी कही जा सकती है। इस लिहाज़ से यह एक पहल भी है। कोलकाता के बाहरी भाग में फैले एक विश्वविद्यालय का हॉस्टल, उपन्यास के मुख्य किरदारों की ग़लती से अभिशप्त हो जाता है। एक आत्मा जो अब हॉस्टल में है, बच्चों को परेशान करती है पर मारती नहीं। इन्हीं पसोपेश, डर, बचने के इंतज़ामात से जो हास्य उत्पन्न होता है, वही इस कहानी का मूल है। कहानी ख़त्म होते-होते हतप्रभ कर देने वाला मोड़ लेती है, जिसके लिए आप सत्य व्यास और उनकी कहानियों को जानते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850125943026,"sku":"9788194653837","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788194653837.webp?v=1786001622"},{"product_id":"9788195106301","title":"Aahuti: Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 3","description":"\u003cp\u003eमहाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह तीसरा चरण है। डॉ. वर्मा और जयंत के साथ रोहन की वसीयत और मुमुक्षुओं के पुरातन सत्य की जड़ें खँगालता और अपने अस्तित्व के लिए जूझता श्रीमंत परिवार उस मोड़ पर आ पहुँचा जब रोहन का सत्य उनके जीवन का सबसे बड़ा झूठ बन गया। वे सदियों पुराने मूक इतिहास के खाली पन्नों से जीवित हुए पुरातन सत्य से दूर थे, किंतु कोई इस दिव्य यज्ञ में उनकी आहुति देने की तैयारी कर चुका था।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850126172402,"sku":"9788195106301","price":319.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195106301.webp?v=1786001657"},{"product_id":"9789392820007","title":"Aako Baako । आको-बाको","description":"\u003cp\u003eदो दोस्त, जो ढूँढ़ने चले हैं कि कविता आख़िर कहाँ से आती है। एक छोटे शहर की सुपर मॉम, जो रोज़ टीवी पर आने का सपना देखती है। भोपाल की वो लड़की, जो अब भी अपने मुंबई के पेन फ़्रेंड को हाथ से लिखी चिट्ठियाँ भेजती है। एक मॉडल, जिसका एक गाना हिट होने के बाद सब कुछ फ़्लॉप हो गया। देहरादून में रहने वाला डाकिया, जो शहर का सबसे अच्छा ऐक्टर है। लखनऊ की पुरानी हवेली में रहने वाले ज़िंदा लोग, जिनको लोगों ने भूत मानकर छोड़ दिया है। द्रौपदी, जिसने पाँच भाइयों में बँटने से मना कर दिया था। गौतम बुद्ध, जो अगर घर लौट गए होते तो क्या होता!\u003cbr\u003e\nदिव्य प्रकाश दुबे की ये 16 कहानियाँ, अलग-अलग शहरों में रहने वाले आम और ख़ास दोनों तरह के लोगों को नए शेड में दिखाने की कोशिश करती हैं। वे लोग, जो अपनी आधी-अधूरी हसरतों के साथ भी पूरे हैं\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850127843570,"sku":"9789392820007","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820007.webp?v=1786001665"},{"product_id":"9788194844303","title":"Chaay-Si Mohabbat","description":"\u003cp\u003eचाय और मोहब्बत दोनों की तासीर गर्म होती है पर दोनों ही रूह में ताज़गी और ठंडक भरती हैं। ये कविताएँ और इनका कवि कैसा है यह फ़ैसला तो सुधी पाठक करेंगे पर यह आपके ज़ेहन को मोहब्बत से सराबोर करेंगी ऐसा मेरा विश्वास है। जब हम कविता रचने या चाय बनाने की प्रक्रिया में होते हैं तब हमें उसके स का पता नहीं होता। ज़िन्दगी में और मोहब्बत में भी ठीक वैसा ही होता है, जब हम प्यार में होते हैं तो बस होते हैं... उसके स से बेपरवाह... अनजान। चाय पी लेने और ज़िन्दगी जी लेने के बाद जो बचता है वही उसका असली हासिल है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850128236786,"sku":"9788194844303","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788194844303.webp?v=1786001699"},{"product_id":"9788194844327","title":"Dhanika । धनिका","description":"\u003cp\u003eबच्चे को जन्म देते समय 206 हड्डियों के टूटने का दर्द सह लेने वाली औरत एक नाजुक ख्याल दरकने की पीड़ा क्यों बर्दाश्त नहीं कर पाती है? क्या रिश्ते निभाने का अर्थ रूहानी न होकर उम्मीदों और दुनियादारी की जिम्मेदारी का सही गणितीय संतुलन है? ऐसे आदिम सवालों के जवाब तलाशने धनिका प्रेमा अर्चना -संजय और वासु के जीवन सफर पर चलिए ‘धनिका’ के साथ। ‘धनिका’ कहानी उन रिश्तों की जो रह-रहकर पिछले 17 साल से मेरे जेहन में ख़दबद मचाए थे। उन चेहरों की जिन्हें मैं आखिरी साँस तक नहीं भूल सकती। उन त्रासदियाँ की जिनकी नमी प...See More\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850128433394,"sku":"9788194844327","price":120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788194844327.webp?v=1786001715"},{"product_id":"9788195106394","title":"Dragon's Game । ड्रैगन्स गेम","description":"\u003cp\u003eजब से इस धरा पर जीव हैं, इतिहास साक्षी है तभी से ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली सिद्धांत के रूप में लागू है। बस ‘लाठी’ और ‘भैंस’ के स्वरूप बदलते रहे हैं। वर्तमान समय में विश्व में कीमती संसाधनों पर अधिकार करने की लड़ाई जारी है। शीत युद्ध, तेल के लिए खाड़ी देशों की लड़ाई इत्यादि इसके उदाहरण हैं। पराधीनता का स्तर अब भौतिक नहीं, आर्थिक और वैचारिक हो गया है। ‘लाठी’ के रूप में है टेक्नोलॉजी और अर्थशक्ति। क्रियान्वयन का तरीका हो गया है जासूसी और गुप्त ऑपरेशन। मई, 1998 में भारत ने परमाणु विस्फोट कर सारे विश्व को स्तब्ध कर दिया था। इस घटना से सबसे ज्यादा जो बौखलाया, वह था- चीन। इसके पहले तक भूमंडल के 200 के लगभग देशों में केवल 5 सुपर पॉवर थे, अब भारत छठा हो गया था। इतना ही नहीं, एशिया के लगभग 50 देशों में अब तक केवल चीन ही सुपर पॉवर था, अब भारत भी हो गया था। 20वीं सदी के अंत तक, विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तमाम यूरोपीय राष्ट्रों को भारी अंतर से पछाड़कर, चीन दूसरे नंबर पर आ गया था। उसके आगे अब एक ही अजेय दुर्ग बचा था, ‘अमेरिका’, जिसके पीछे वह अपनी सारी टेक्नोलॉजी और ख़ुफ़िया शक्ति लगा चुका था। अंतर कम करने के 2 तरीके होते हैं—पहला, स्वयं तेजी से बढ़ना, दूसरा, विरोधी को रोक लेना या पीछे धकेल देना। वह दोनों ही तरीके आजमा रहा था। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनैतिक समीकरण में प्रत्यक्ष से ज्यादा खम-पेंच परोक्ष लड़ाए जाते हैं। उनका क्रियान्वयन आसान तथा किफायती होता है और उनके परिणाम भी बहुत आकर्षक होते हैं। परमाणु विस्फोट के तुरंत बाद ही चीन चेता और उसने अपना वर्चस्व बचाने के लिए छद्म रूप से भारत में ऑपरेशन आरंभ कर दिया। उसे भारत को पीछे धकेलना था। इस काम के लिए उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने 4 प्रशिक्षित अफ़सर भारत में प्लांट किए, जो अगले 2 दशकों तक किस तरह सांस्कृतिक, वैचारिक, राजनैतिक, धार्मिक, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और रक्षा के कैनवास पर फैलकर, इन्हें अंदर ही अंदर कमजोर करके राष्ट्र को कमजोर करते हैं और अंत में किस तरह पकड़े जाते हैं, यह कहानी है ‘ड्रैगन्स गेम’ की।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850128564466,"sku":"9788195106394","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195106394.webp?v=1786001731"},{"product_id":"9788194844341","title":"Mitti Ki Paraat","description":"\u003cp\u003eसंजय व्यास अपने गद्य के अनूठेपन के लिए जाने जाते हैं। अपनी तरह की रचनाओं की उनकी ये दूसरी किताब है। पहली किताब 'टिम टिम रास्तों के अक्स' भी हिंद-युग्म से ही कुछ बरस पहले प्रकाशित। यह किताब - मिट्टी की परात छोटी छोटी रचनाएँ हर रचना अपनी हसरतों में एक कहानी है। या कह सकते हैं, इस किताब की हर ‘कहानी’ ऐसी, जो कहानी होने से कुछ क़दम पहले ठहर जाती है, सुस्ताने लग जाती है। पाठक रचना के खुले सिरों को अपनी तरह से पकड़ता है, उसे अपने तरीक़े से कहानी होने तक 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जादूगर","description":"\u003cp\u003e‘यार जादूगर’ हिंदी साहित्य की मुख्य धारा के उपन्यासों में विषय-वस्तु के लिहाज से एकदम नया और चौंकाने वाली कहानी है। कल्पना की जमीन पर बोया गया ऐसा यथार्थ जो मानवीय संबंधों और उसके मनोविज्ञान पर दार्शनिकता की गाँठ खोलता रेशा-रेशा उघाड़ते हुए एक प्राकृतिक शाश्वत सत्य के समीप पहुँच पूर्ण होता है। ‘यार जादूगर’ मृत्यु का महोत्सव है और जीवन का लोक संगीत भी, जो मृत्यु की अनिवार्यता को स्वीकार कर जीवन की सार्थकता को मलंग हो स्वीकार करने की कोशिश है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850129744114,"sku":"9788195306121","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195306121.webp?v=1786001844"},{"product_id":"9789392820045","title":"Agla Prishth । अगला पृष्ठ","description":"\u003cp\u003e‘अगला पृष्ठ’ इलाहाबादी छात्र जीवन की दास्तान पर, अपने समय की सर्वाधिक चर्चित कृति ‘शेष अगले पृष्ठ पर’ के लोकप्रिय लेखक के डी सिंह की आगामी कृति है। इलाहाबाद में पढ़ रहे, और कम्पटीशन की तैयारी कर रहे छात्रों के सुख-दुख, उत्साह-नैराश्य, हताशा, क्षोभ, के बावजूद, जीवन के एक स्वर्णिम टुकड़े की फुटकर दास्तानों को लेकर आया है ‘अगला पृष्ठ’।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850129776882,"sku":"9789392820045","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820045.webp?v=1786001853"},{"product_id":"9789392820199","title":"Baahar Se Bheetar । बाहर से भीतर","description":"\u003cp\u003eयह किताब अकेले की गई यात्राओं को ठीक से समझने का प्रयास है। एकल यात्राएँ किसी के साथ की गई यात्राओं की ठीक विपरीत दिशा में जाती हैं। एकल यात्रा अमूमन आपको घनघोर उलझन और असहजता के ठीक मध्य में छोड़ देती है। सारा बिखरा पड़ा छोड़कर जब हम अकेले यात्रा पर सुख की तलाश में निकलते हैं तब ये पता ही नहीं होता की भागकर आख़िर हम अपनी ही निज में आ पहुँचेंगे।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइस किताब का लिखा उसी निज के दायरे में दोबारा पहुँचकर उसे एक आख़री बार छू लेने का प्रयास है। वही सारा कुछ ठीक से समझ लेने का प्रयास है जो इस यात्रा के दौरान बीज की तरह भीतर बोया जा रहा था। यह किताब उन्हीं बीजों के सालों बाद पेड़ बन जाने का अनुभव जैसा कुछ है। उनकी छाँव में कुछ समय बिताकर आगे चल देने जैसा कुछ।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850129973490,"sku":"9789392820199","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820199.webp?v=1786001861"},{"product_id":"9788195106363","title":"Chunavneeti । चुनावनीति","description":"\u003cp\u003e‘चुनावनीति’ किताब जहाँ सियासी पार्टियों के चुनावी हथकंडों के बारे में बताती है, वहीं भारत की लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था पर पड़ रहे इसके नकारात्मक प्रभाव को भी रेखांकित करती है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि पॉलिटिकल पंडितों ने चुनावों को समझने के लिए जिन सिद्धांतों को सेट किया है, वे तर्कों और तथ्यों के साथ मेल नहीं खा रही हैं। सच यह है कि चुनावों को किसी सेट फॉर्मूले के आधार पर समझा नहीं जा सकता। विधानसभा हो या फिर लोकसभा, सभी चुनाव अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर होते हैं। धर्मवाद, जातिवाद और क्षेत्रवाद की राजनीति भी परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग समय पर काम करती है। यही वजह है कि पार्टियों को इन चुनावी हथकंडों के सहारे हर बार सफलता नहीं मिलती है। इस तरह की तमाम चीजें हैं, जिन्हें इस किताब के ज़रिए खोलने की कोशिश की गई है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130333938,"sku":"9788195106363","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195106363.webp?v=1786001894"},{"product_id":"9789392820052","title":"Ghongha Basant । घोंघा बसंत","description":"\u003cp\u003eडॉ. एस.डी. वैष्णव लिखित उपन्यास ‘घोंघा बसंत’ साहित्य के एक प्रोफ़ेसर की कहानी पर आधारित है जो स्वप्नलोक में ग़ोता लगाता रहता है, जहाँ उसकी मुलाक़ात जादुई घोंघों से होती है। फिर उनके बताए अनुसार वह प्रोफ़ेसर रहस्यमय मणि, सुंदर राजकुमारी की खोज करने और खमेर साम्राज्य का सम्राट बनने का सपना लिए एक लंबी यात्रा पर निकल पड़ता है। इस बीच यात्रा में एक विदेशी महिला की ओर उसका आकर्षण भी बढ़ता है। एक साथ कई सारे द्वंद्व उसके भीतर चलते रहते हैं, लेकिन अंत तक वह रहस्यमय मणि तक पहुँचने का प्रयास जारी रखता है। मूल रूप से फ़ैंटेसी शैली में लिखा गया यह एक रहस्यमय उपन्यास है जिसमें राजनीतिक ठसका, बॉलीवुड का मसाला और हास्य-व्यंग्य के तड़कों का अच्छा समुच्चय है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130661618,"sku":"9789392820052","price":159.1,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820052.webp?v=1786001927"},{"product_id":"9789392820212","title":"Jitni Mitti Utna Sona । जितनी मिट्टी उतना सोना","description":"\u003cp\u003eकुमाऊँ, उत्तराखंड के सुदूर हिमालयी इलाक़े में भारत-तिब्बत सीमा से लगी व्यांस, दारमा और चौंदास घाटियों में निवास करने वाले लोग सदियों से तिब्बत के साथ व्यापार करते आए हैं। अपने आप को रं कहने वाले ये जन अद्वितीय सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से लैस एक अनूठी सभ्यता के ध्वजवाहक हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eयह यात्रावृत्त इन्हीं घाटियों में की गई अनेक लंबी शोध-यात्राओं का परिणाम है। यह आपका परिचय संसार के एक ऐसे रहस्यमय हिस्से से करवाएगा जिसके बारे में बहुत कम प्रामाणिक कार्य हुआ है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eइस किताब में आपको बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हिमालय की गोद में निवास करने वाले रं समाज की सांस्कृतिक संपन्नता के दर्शन तो होंगे ही, आप उस अजेय जिजीविषा और अतिमानवीय साहस से भी रू-ब-रू होंगे जिसके बिना इन दुर्गम घाटियों में जीने की कल्पना तक नहीं की जा सकती।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eमानवशास्त्रीय महत्त्व के विवरणों से भरपूर इस यात्रावृत्त में कथा, गल्प, कविता, लोक साहित्य, और स्मृति के ताने-बाने से एक तिलिस्म रचा गया है जिसमें बुज़ुर्गों के सुनाए क़िस्सों की परिचित ऊष्मा भी है और अजनाने भूगोल में यात्रा करने का रोमांच भी\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130825458,"sku":"9789392820212","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820212.webp?v=1786001944"},{"product_id":"9789392820267","title":"Kaisa Kutta Hai । कैसा कुत्ता है","description":"\u003cp\u003eकैसा कुत्ता है!' घुमक्कड़ कलाकार, गायक और कवि राहगीर की कविताओं का पहला संकलन है। इस संग्रह में राहगीर के लोकप्रिय गीतों के साथ बहुत-से ऐसे गीत और कविताएँ शामिल हैं, जो अभी तक न कहीं प्रकाशित हुए हैं और न ही प्रस्तुत।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850130956530,"sku":"9789392820267","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820267.webp?v=1786001962"},{"product_id":"9789392820403","title":"Musafir Café","description":"\u003cp\u003eहम सभी की जिंदगी में एक लिस्ट होती है। हमारे सपनों की लिस्ट, छोटी-मोटी खुशियों की लिस्ट। सुधा की जिंदगी में भी एक ऐसी ही लिस्ट थी। हम सभी अपनी सपनों की लिस्ट को पूरा करते-करते लाइफ गुज़ार देते हैं। जब सुधा अपनी लिस्ट पूरी करते हुए लाइफ़ की तरफ़ पहुँच रही थी तब तक चंदर 30 साल का होने तक वो सबकुछ कर चुका था जो कर लेना चाहिए था। तीन बार प्यार कर चुका था, एक बार वो सच्चा वाला, एक बार टाइम पास वाला और एक बार लिव-इन वाला। वो एक पर्फेक्ट लाइफ चाहता था। मुसाफिर Cafe कहानी है सुधा की, चंदर की, उन सारे लोगों की जो अपनी विश लिस्ट पूरी करते हुए perfect लाइफ खोजने के लिए भटक रहे हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131185906,"sku":"9789392820403","price":139.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820403.webp?v=1786001996"},{"product_id":"9789392820069","title":"Nain Banjare । नैन बंजारे","description":"\u003cp\u003eबेसिम्त ज़िंदगी की धूप में प्यार के घने साए की ज़रूरत को वही समझ सकता है जो तपते सहरा में पानी की तलाश में भटक रहा हो। खो चुके प्यार की तलाश में बेचैन रूहें भटकने को मजबूर हो ही जाती हैं। उनके नैन बंजारे बने भटकते रहते हैं इधर-उधर। दिन कहीं और रात कहीं। ज़ाहिर है, प्यार की ज़मीन जब बंजर हो जाती है तो अक्सर नैन बंजारे रेगिस्तानों में भटकने लगते हैं। कहानियों के इस संग्रह ‘नैन बंजारे’ में भी एक तलाश है और उस तलाश के दौरान रास्ते में मिले कुछ पड़ावों की शक्ल में कहानियाँ हैं। इन कहानियों की बुनियाद में दादा-दादी के ‘खिस्से’ ज़रूर हैं, लेकिन इनकी इमारत नई है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131218674,"sku":"9789392820069","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820069.webp?v=1786002004"},{"product_id":"9789392820458","title":"Prem Kabootar","description":"\u003cp\u003eमैं नास्तिक हूँ। कठिन वक़्त में यह मेरी कहानियाँ ही थी जिन्होंने मुझे सहारा दिया है। मैं बचा रह गया अपने लिखने के कारण। मैं हर बार तेज़ धूप में भागकर इस बरगद की छाँव में अपना आसरा पा लेता। इसे भगोड़ापन भी कह सकते हैं, पर यह एक अजीब दुनिया है जो मुझे बेहद आकर्षित करती रही है। इस दुनिया में मुझे अधिकतर हारे हुए पात्र बहुत आकर्षित करते रहे हैं। हारे हुए पात्रों के भीतर एक नाटकीय संसार छिपा हुआ होता जबकि जीत की कहानियाँ मुझे हमेशा बहुत उबा देने वाली लगती हैं। जब भी मैंने अपना कोई लिखा पूरा किया है उसकी मस्ती मेरी चाल में बहुत समय तक बनी रही है। अगर हम प्रेम पर बात करें तो मैंने उसे पाया अपने जीवन में है पर उसे समझा अपने लिखे में है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131284210,"sku":"9789392820458","price":159.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820458.webp?v=1786002013"},{"product_id":"9789392820328","title":"Shirt Ka Teesra Button । शर्ट का तीसरा बटन","description":"\u003cp\u003eशर्ट का तीसरा बटन\" मानव कौल का एक भावनात्मक और संवेदनशील हिंदी उपन्यास है, जिसे हिंदी युग्म द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह उपन्यास ज़िंदगी के छोटे-छोटे लम्हों, रिश्तों और भीतर के बदलावों को बेहद सुंदरता से दर्शाता है। शर्ट का तीसरा बटन एक प्रतीक बन जाता है उन भावनाओं का, जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eमानव कौल की विशिष्ट लेखन शैली—जो भावनाओं को गहराई से छूती है—इस किताब को एक खास अनुभव बनाती है। हिंदी साहित्य और आत्मिक कहानियों के पाठकों के लिए यह एक अवश्य पढ़ी जाने वाली पुस्तक है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131579122,"sku":"9789392820328","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820328.webp?v=1786002047"},{"product_id":"9788195306190","title":"Varshavaas । वर्षावास","description":"\u003cp\u003eएक उपन्यासकार का मस्तिष्क बहुत हाल के नहीं अपने पूर्वज उपन्यासकारों के पाठ और कथा-विवेक से बनता है। यहाँ एक सुविधा के लिए मान लीजिए कि अब तक हुए सुप्रतिष्ठित उपन्यासकारों के मार्ग विविध-विभिन्न सही, पर उनका केंद्रीय लक्ष्य एक ही रहा होगा-उपन्यास की अब तक प्रस्तुत-प्रचलित परिभाषाओं, कथाओं और संरचनाओं से बाहर चले जाना। इसमें सफलता या असफलता भविष्य का कष्ट है, लेकिन सार्वजनिक होने के बिल्कुल अंतिम क्षणों तक इस प्रयत्न और प्रक्रिया में बने रहना एक महत्त्वपूर्ण विचार-अनुभव है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850131874034,"sku":"9788195306190","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9788195306190.webp?v=1786002073"},{"product_id":"9789392820601","title":"Dehaati Ladke । देहाती लड़के","description":"\u003cp\u003eयह एक ग्रामीण इलाके के लड़के रजत की कहानी है, जो गांव के स्कूल से पढ़कर अपनी उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ शहर में आता है। अधिकारी बनने की उच्च आकांक्षाएं, अपने शिष्टाचार में मामूली देसीपन, वह कॉलेज के आसपास अपने तरीके से संघर्ष करता है। शहर और कॉलेज उसका अवशोषण करना शुरू कर देते हैं और वह शहर के तरीकों को अपनाने की कोशिश करने लगता है। घटनाओं के मोड़ में एक क्लासी लड़की और दो विपरीत प्रकृति के लड़कों से उसकी मुलाकात होती है। वे अच्छे दोस्त बन जाते हैं और फिर कुछ दिलचस्प चीजें होने लगती हैं। समय बीतने के साथ, करियर के लिए दबाव और दोस्तों के साथ गलतफहमी उनके रास्ते अलग कर देती है। तब रजत को पता चलता है कि यह दुनिया इतनी निष्पक्ष नहीं है और जब तक वह अपने आपको साबित नहीं कर देता, तब तक वह हमेशा एक बाहरी व्यक्ति बनकर ही रहेगा, शहर के लिए एक देहाती लड़का। क्या गलतफहमी उनके पुनर्मिलन को रास्ता देगी?\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850132103410,"sku":"9789392820601","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820601.webp?v=1786002099"},{"product_id":"9789392820076","title":"Dveshdrohi । द्वेषद्रोही","description":"\u003cp\u003eबीते दिनों में हम सब, पहले से ज्यादा अकेले हुए हैं। कितने दोस्तों को दूसरा शहर नौकरी की जंजीरों में बाँधकर अपने साथ ले गया और कितने अजीज रिश्ते राजतीनिक बहसों में उलझकर टूट गए। सोशल मीडिया की फिजूल प्रायोजित बहसों में लड़ते हुए हम अपने आसपास के लोगों से कितने दूर चले आए, अहसास नहीं हुआ। धर्म, जाति, वाद, ट्वीट, मीम, रील्स और वायरल होने की गुमनाम दुनिया में अपने-आपको ढूँढ़ने की कोशिश है यह किताब। हर तरफ फैलते जा रहे द्वेष के द्रोह में प्रेम की कहानी है 'द्वेषद्रोही'।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850132234482,"sku":"9789392820076","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820076.webp?v=1786002107"},{"product_id":"9789392820533","title":"Haqiqat Nagar । हक़ीक़त नगर","description":"\u003cp\u003eनब्बे के दशक की शुरुआत में दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज उसके हॉस्टल और उसके आस-पास की ज़िंदगी है और मोबाइल फ़ोन से पहले के उस दौर में पाँच दोस्तों की लीक से हटकर प्रेम कहानियाँ हैं। एक-एक पाई की अहमियत दोस्तों के लिए वक़्त ही वक़्त बिंदासपन और बेफ़िक्री के उस दौर में राजनीतिक सामाजिक और आर्थिक सभी स्तर पर बदलाव साफ़-साफ़ दिखने लगा था। क़र्ज़ से दबे देश को उबारने के लिए कई दलों वाली गठबंधन की सरकार चला रहे पीवी नरसिम्हा राव ने बाज़ार खोल दिए थे। पूरी दुनिया के लिए भारत एक बाज़ार के तौर...See More\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850132267250,"sku":"9789392820533","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820533.webp?v=1786002116"},{"product_id":"9789392820595","title":"Lahartara । लहरतारा","description":"\u003cp\u003eबनारस के एक छोटे से मोहल्ले में बड़ा होता एक लड़का घर के माहौल से ऊब कर संतों की संगति में बैठने लगता है और दुनिया देखने का उसका नज़रिया बदलने लगता है। वो बड़ा होकर लेखक बनना चाहता है और इस सपने को जीते हुए वह बचपन की दोस्तियों और जवानी के प्यार से रूबरू होता है। बनारस की बिंदास दोस्ती और मोहल्ले का प्रेम उसकी ज़िन्दगी में आकर कैसे उसे बदलता है और वो कैसे आज के समय के सबसे बड़े हादसे से गुज़रता है यानी भीड़ से घिरे होने के बावजूद अकेला पड़ जाना, इसी की कहानी है लहरतारा। चुटीली भाषा में बनारसी छौंक के साथ अपने समय का 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इस बार शायद शिकार का साथ इत्तफ़ाक़ न देता।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eफिर एक जना पीडी सुधीर कोहली की शरण में पहुँच गया।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eपाँच दिन\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eफ़िलॉस्फ़र-डिटेक्टिव सुधीर कोहली का सबसे विकट केस।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eआदि से अंत तक रोचक। एक ही बैठक में पठनीय।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eटॉप मिस्ट्री राइटर\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eसुरेन्द्र मोहन पाठक\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eका नवीनतम उपन्यास।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850132857074,"sku":"9789392820687","price":239.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820687.webp?v=1786002175"},{"product_id":"9789392820960","title":"Ishq Baghawat । Ishq Bagawat । इश्क़ बग़ावत","description":"\u003cp\u003e‘इश्क़ बग़ावत’ किसी भी नए-नए जवान हो रहे लड़के की यात्रा है एक ऐसी यात्रा जो मोहब्बत और क्रांति की जुड़ती हुई हथेलियों के बीचोबीच से गुज़रती है। इस किताब की नज़्में आपको भागम-भाग भरी ज़िंदगी से खींच कर उन्हीं कालिज की पगडंडियों पर पहुँचा देती हैं जहाँ आप अपना दिल छोड़ आए थे।शेर ऐसे कि जिसपर लाखों रील्स बनते हैं और धड़कते हुए दिलों को बोल मिल जाते हैं।इसकी कविताएँ जो चेहरा उकेरती हैं वो बिल्कुल आपके हिस्से वाले चेहरे से मेल खाता है।कुछ ऐसे क्रांति गीत हैं जो आपकी धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ा देते हैं। और आपकी ज़िद को एक धारदार आवाज़ मिल जाती है। फ़िल्म ‘मेजर’ में अपने पहले ही गीत ‘साथिया’ से चर्चा में आए रितेश रजवाड़ा को उनकी शानदार भाषा शैली और बेहतरीन शायरी के लिए जाना जाता है। फ़िल्मी गीत हों शेरो-शायरी हो या छात्र आंदोलनों के मंचों से गाई जाने वालीं इंक़लाबी नज़्में उन्होंने हर जगह अपनी छाप छोड़ी है। स्टूडेंट्स व युवा लिखने-पढ़ने वालों के बीच रितेश सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं।ये उनकी पहली किताब है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850133283058,"sku":"9789392820960","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820960.webp?v=1786002210"},{"product_id":"9789392820694","title":"Sorry Dulari । सॉरी दुलारी","description":"\u003cp\u003eसॉरी दुलारी एक माँ की कहानी है जिसने औलाद पाने के लिए सात साल लंबा इंतज़ार किया। वह स्वयं बहुत धार्मिक है लेकिन उसका पति तर्क के अलावा न किसी धर्म को मानता है न भगवान को। दोनों में बहुत तकरार है फिर भी अथाह प्यार है। लंबे इंतज़ार के बाद उनके घर किलकारी गूँजती है, एक प्यारी-सी बच्ची पैदा होती है। लेकिन वह बच्ची सामाजिक मान्यताओं के आधार पर ‘नॉर्मल’ नहीं है।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eउस असाधारण बच्ची पर जब समाज की नज़र पड़ती है तो धर्म और ममता आमने-सामने आ जाते हैं। अत्यधिक धार्मिक समाज, मीडिया, सोशल मीडिया, क़ानून, परिवार और दोस्त इस माँ के लिए मुसीबत बढ़ाते हैं या उसके साथ खड़े होते हैं, यह आपको किताब पढ़कर पता चलेगा।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eकाल्पनिक समय और शहर में बसी यह कहानी एक सामाजिक व्यंग्य है।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49850133774578,"sku":"9789392820694","price":199.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0842\/6881\/0482\/files\/9789392820694.webp?v=1786002255"},{"product_id":"9789392820724","title":"Swaha : Mahabharat Aadhaarit Pauranik Rahasya Gaatha Khand 5","description":"\u003cp\u003eमहाभारत आधारित पौराणिक रहस्य गाथा का यह पाँचवाँ और अंतिम चरण है। चिरंजीवियों और मुमुक्षुओं के बीच युगों पुराने युद्ध को समाप्त करने की सनक में जयंत साक्षी का सामना करते हुए रोहन की वसीयत के उस अंतिम सच तक पहुँच गया जिसमें श्रीमंत परिवार और उसकी मुक्ति थी।\u003cbr\u003e\nलेकिन उसकी मुक्ति में सिर्फ साक्षी ही आखिरी बाधा नहीं था।\u003c\/p\u003e","brand":"Hind Yugm","offers":[{"title":"Default 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